Monday, 15 Jun 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > अन्य > शुक्रवार व्रत: माता लक्ष्मी और संतोषी माता की कृपा पाने का सरल और प्रभावशाली मार्ग
अन्य

शुक्रवार व्रत: माता लक्ष्मी और संतोषी माता की कृपा पाने का सरल और प्रभावशाली मार्ग

दिव्यसुधा
Last updated: June 5, 2026 11:39 am
दिव्यसुधा
Share
शुक्रवार व्रत के दौरान माता लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा करती हुई श्रद्धालु महिला
श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया शुक्रवार व्रत सुख, समृद्धि और संतोष का मार्ग प्रशस्त करता है।
SHARE

हिंदू धर्म में सप्ताह के प्रत्येक दिन का अपना विशेष धार्मिक महत्व है। शुक्रवार का दिन विशेष रूप से धन, वैभव, सुख-समृद्धि और संतोष की देवी माता लक्ष्मी तथा संतोषी माता को समर्पित माना जाता है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर माता की पूजा-अर्चना करते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति तथा आर्थिक समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया शुक्रवार व्रत जीवन की अनेक परेशानियों को दूर करने में सहायक होता है तथा घर-परिवार में खुशहाली का वातावरण बनाता है।

क्यों रखा जाता है शुक्रवार का व्रत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। वहीं संतोषी माता संतोष, सुख और पारिवारिक सौहार्द प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजनीय हैं। शुक्रवार का व्रत करने से व्यक्ति को आर्थिक समस्याओं से राहत मिल सकती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

कई लोग व्यापार में सफलता, नौकरी में उन्नति, पारिवारिक सुख-शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इस व्रत का संकल्प लेते हैं। विशेष रूप से महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण के लिए यह व्रत करती हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टि से पुरुष भी समान रूप से इस व्रत को रख सकते हैं।

शुक्रवार व्रत की शुरुआत कैसे करें?
शुक्रवार व्रत किसी भी शुभ शुक्रवार से प्रारंभ किया जा सकता है। व्रत के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल की साफ-सफाई करके माता लक्ष्मी या संतोषी माता की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें।

पूजा के समय माता को सफेद, गुलाबी या लाल रंग के पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। घी का दीपक जलाकर माता का ध्यान करें और अपनी मनोकामना उनके चरणों में अर्पित करें। श्रद्धा और एकाग्रता के साथ की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

पूजा में किन सामग्रियों का उपयोग करें?
शुक्रवार व्रत की पूजा में फूल, रोली, अक्षत (चावल), अगरबत्ती, दीपक, मिश्री, फल और मिठाई का उपयोग किया जाता है। माता लक्ष्मी को खीर, बताशे या सफेद मिठाई का भोग लगाना शुभ माना गया है।

यदि संतोषी माता का व्रत किया जा रहा हो तो गुड़ और चने का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा के बाद संतोषी माता की कथा, लक्ष्मी चालीसा, श्रीसूक्त या माता के मंत्रों का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।

व्रत के दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए?
शुक्रवार व्रत में सात्विकता का विशेष महत्व है। व्रतधारी को क्रोध, नकारात्मक विचार और अनावश्यक विवादों से दूर रहना चाहिए। कई लोग दिनभर निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु शाम को एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।

संतोषी माता के व्रत में खट्टी वस्तुओं का सेवन वर्जित माना गया है। इसलिए नींबू, इमली, अचार और अन्य खट्टी चीजों से परहेज करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि इस नियम का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

कितने शुक्रवार तक करना चाहिए व्रत?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार श्रद्धालु अपनी मनोकामना और संकल्प के अनुसार 11, 16 या 21 शुक्रवार तक व्रत रख सकते हैं। व्रत की निर्धारित अवधि पूर्ण होने पर उद्यापन किया जाता है।

उद्यापन के अवसर पर जरूरतमंदों को भोजन कराना, वस्त्र दान करना और यथाशक्ति दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सेवा और परोपकार की भावना को भी प्रोत्साहित करता है।

शुक्रवार व्रत के आध्यात्मिक और धार्मिक लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार व्रत से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है तथा आर्थिक स्थिति में सुधार के अवसर प्राप्त होते हैं।

इसके साथ ही यह व्रत मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देता है। जब व्यक्ति श्रद्धा, संयम और भक्ति के साथ व्रत करता है, तो उसके भीतर आध्यात्मिक संतुलन विकसित होता है और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण बनता है।

शुक्रवार व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन, श्रद्धा और सकारात्मक जीवनशैली का प्रतीक है। माता लक्ष्मी और संतोषी माता की कृपा प्राप्त करने के लिए यह व्रत अत्यंत लोकप्रिय माना जाता है। यदि इसे पूरी निष्ठा, नियम और सच्ची आस्था के साथ किया जाए, तो यह व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक संतोष का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। माता की भक्ति में किया गया प्रत्येक प्रयास जीवन को नई ऊर्जा और सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।

Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article 15 जून 2026 राशिफल भविष्यवाणी में सभी 12 राशियों के लिए करियर, धन और जीवन में बदलाव के संकेत 4 जून 2026 राशिफल: मेष से मीन राशि तक जानें कैसा रहेगा आपका दिन
Next Article 15 जून 2026 राशिफल भविष्यवाणी में सभी 12 राशियों के लिए करियर, धन और जीवन में बदलाव के संकेत 6 जून 2026 राशिफल: मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का दैनिक भविष्यफल
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु पवित्र नदी में स्नान कर अन्न, वस्त्र और दीपक का दान करते हुए
अन्य

कार्तिक पूर्णिमा 2025 पर दान का महत्व – जानिए क्या और क्यों करें दान

By दिव्यसुधा
गंगा सप्तमी 2026 पूजा, शुभ योग और गंगा स्नान का महत्व
अन्य

गंगा सप्तमी 2026: शुभ योग, महत्व और पवित्र उपाय

By दिव्यसुधा
यह तस्वीर घर में धन स्थिरता के लिए वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा में तिजोरी, श्री यंत्र और भगवान कुबेर की स्थापना दर्शाती है।
अन्य

घर की ये घटनाएं देती है संकेत, समय रहते हो जाएं सावधान

By दिव्यसुधा
मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा करते भक्त, सिंदूर और लड्डू के साथ बजरंगबली की आराधना
अन्य

धन, विद्या, सफलता और शत्रु नाश के लिए करें, हनुमान चालीसा के चार चमत्कारी चौपाइयों का पाठ

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?