सनातन परंपरा में गंगा को पापों का नाश करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली देवी माना गया है। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी मनाई जाती है। इस वर्ष यह पावन पर्व 23 अप्रैल, गुरुवार को मनाया जा रहा है। इस दिन पांच शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है। मान्यता है कि गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान, दान और पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं।
गंगा सप्तमी क्यों मनाते हैं?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा भगीरथ ने अपने 60 हजार पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन अपने कमंडल से मां गंगा को पृथ्वी पर प्रकट किया। इसके बाद भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया और धीरे-धीरे उन्हें धरती पर प्रवाहित किया। गंगा के पवित्र जल के स्पर्श से राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ। यही कारण है कि इस दिन को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है।
गंगा सप्तमी पर बनने वाले शुभ योग
इस वर्ष गंगा सप्तमी के दिन सुकर्मा योग, धृति योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, गुरु पुष्य योग और अमृत सिद्धि योग जैसे पांच अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं। ये सभी योग पूजा-पाठ, दान और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। विशेष रूप से सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन बना रहेगा, जिससे हर कार्य में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
गंगा सप्तमी का महत्व
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना सबसे उत्तम माना जाता है। यदि गंगा नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी पुण्यदायक होता है। अभिजीत मुहूर्त और अन्य शुभ समय में पूजा, जप और दान करने से विशेष फल मिलता है।
गंगा सप्तमी पर करें ये खास उपाय
इस पावन दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान करें या गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद जल का दान करें, विशेष रूप से प्यासे लोगों को पानी पिलाना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। गुरु पुष्य योग में नई संपत्ति, वाहन, सोना-चांदी आदि की खरीदारी करना शुभ माना जाता है।
इस दिन माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से धन, वैभव और समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही गंगा स्तोत्र का पाठ करने से पापों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है। गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है, जिससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
गंगा सप्तमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर है। इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ मां गंगा की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है तथा अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।