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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > शनि देव: न्याय, कर्म और जीवन में स्थिरता के देवता
व्रत और त्योहार

शनि देव: न्याय, कर्म और जीवन में स्थिरता के देवता

दिव्यसुधा
Last updated: February 28, 2026 12:43 pm
दिव्यसुधा
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शनि देव की मूर्ति, न्याय और कर्म के देवता, पूजा के लिए सजाई गई
शनि देव की पूजा और व्रत से जीवन में स्थिरता, सफलता और मानसिक शांति प्राप्त होती है
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शनि देव नवग्रहों में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। वे न्याय और कर्म के देवता माने जाते हैं, जो व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनि देव का प्रभाव जीवन में धैर्य, मेहनत, परीक्षा, बाधाएँ और सफलता से जुड़ा होता है। यदि जन्म कुंडली में शनि की स्थिति कठिन हो, तो व्यक्ति को रोग, मानसिक परेशानी, आर्थिक संकट और सामाजिक बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

शनि देव का स्वरूप गंभीर, शांत और न्यायप्रिय है। उनके दर्शन मात्र से व्यक्ति का भय दूर होता है और जीवन में स्थिरता आती है। कहा जाता है कि शनि देव की कृपा से जीवन की कठिनाइयाँ और शनि दोष कम होते हैं। शनि देव का जन्म सूर्य देव और छाया से हुआ था। बचपन से ही उनका स्वभाव गंभीर और न्यायप्रिय था। शनि देव ने अपने पिता सूर्य से वरदान माँगा कि वे सभी जीवों के कर्मों का न्याय करें। सूर्य देव ने उन्हें आशीर्वाद दिया।


शनि देव की कथा

एक बार शनि देव ने अपने दृष्टि से एक राजा को देखा, जिसने अपने बुरे कर्मों से प्रजा को पीड़ा दी। शनि देव की दृष्टि मात्र से राजा को रोग और कठिनाइयाँ झेलनी पड़ीं। बाद में राजा ने शनि देव की पूजा की और उनके सभी कष्ट समाप्त हो गए। इस कथा से यह स्पष्ट होता है कि शनि देव कर्म और न्याय के देवता हैं। शनि देव की परीक्षा साढ़ेसाती और ढैय्या में अधिक प्रभावशाली होती है। साढ़ेसाती लगभग 7.5 वर्ष की अवधि है और ढैय्या लगभग 2.5 वर्ष। इस दौरान शनि दोष के उपाय और व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है और कष्ट कम होते हैं।


शनि देव व्रत कब करें?

शनि व्रत विशेष रूप से शनिवार को किया जाता है। सावन महीने के शनिवार या अमावस्या के शनिवार व्रत करने से अत्यंत शुभफल मिलता है। साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान यह व्रत करने से जीवन में बाधाएँ कम होती हैं। शनि देव न्यायप्रिय हैं। जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है, उसके ऊपर शनि का प्रभाव शुभ होता है। वहीं जो पाप करता है, उसे शनि देव परीक्षा के रूप में कठिनाइयाँ देते हैं।


शनि देव पूजा और उपाय

शनि देव की पूजा और उपाय करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के समय पूजा और उपाय करने से जीवन में स्थिरता, मानसिक शांति, स्वास्थ्य और सफलता प्राप्त होती है।

  • शनि पूजा के प्रमुख उपाय:
  • काले तिल, उड़द और सरसों का दीपक जलाएं।
  • काले वस्त्र का प्रयोग करें।
  • गरीबों और असहायों को दान दें।
  • “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें।
  • नियमित पूजा और व्रत से शनि दोष कम होता है।

इन उपायों का पालन करने से शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में आने वाली बाधाएँ कम होती हैं।

शनि देव व्रत और पूजा करने से जीवन में स्थिरता, सफलता, मानसिक शांति और स्वास्थ्य आता है। साढ़ेसाती और ढैय्या के समय यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी होता है। शनि देव की पूजा से न केवल व्यक्ति के जीवन में कष्ट कम होते हैं, बल्कि कर्म के अनुसार उचित फल भी मिलता है। शनि देव के व्रत और उपाय व्यक्ति को कठिनाइयों से मुक्त कर सुख, शांति और सफलता प्रदान करते हैं। इसलिए शनि दोष होने पर या जीवन में बाधाएँ आने पर शनि व्रत करना अत्यंत शुभ माना गया है


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