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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > पौष विनायक चतुर्थी 2025: वर्ष की अंतिम विघ्नेश्वर चतुर्थी, शुभ मुहूर्त व महत्व
व्रत और त्योहार

पौष विनायक चतुर्थी 2025: वर्ष की अंतिम विघ्नेश्वर चतुर्थी, शुभ मुहूर्त व महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: December 22, 2025 5:22 pm
दिव्यसुधा
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पौष विनायक चतुर्थी 2025 पर भगवान गणेश की पूजा, विघ्नेश्वर चतुर्थी का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
पौष विनायक चतुर्थी 2025 पर भगवान गणेश की पूजा से दूर होंगे सभी विघ्न
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इस वर्ष की अंतिम विनायक चतुर्थी पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाएगी। इस विशेष चतुर्थी को विघ्नेश्वर चतुर्थी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान गणेश की उपासना करने से जीवन के सभी विघ्न और बाधाएं दूर होती हैं। शास्त्रों के अनुसार विनायक चतुर्थी का व्रत और पूजन करने से कार्यों में सफलता, मानसिक शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस वर्ष चतुर्थी के दिन भद्रा और पंचक का संयोग भी बन रहा है, लेकिन भद्रा का वास पाताल लोक में होने के कारण पूजा पर इसका नकारात्मक प्रभाव नहीं माना गया है।

दिसंबर विनायक चतुर्थी की तिथि
पंचांग के अनुसार पौष शुक्ल चतुर्थी तिथि का आरंभ 23 दिसंबर को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से होगा और इसका समापन 24 दिसंबर को दोपहर 1 बजकर 11 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर विनायक चतुर्थी का व्रत 24 दिसंबर, बुधवार के दिन रखा जाएगा। शास्त्रों में मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा करने से व्रत का फल दोगुना प्राप्त होता है और जीवन की अनेक समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

विनायक चतुर्थी पर बनने वाले शुभ योग
विनायक चतुर्थी के दिन प्रातःकाल से लेकर शाम 4 बजकर 02 मिनट तक हर्षण योग रहेगा, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है। इसके बाद वज्र योग का निर्माण होगा। वहीं धनिष्ठा नक्षत्र प्रातःकाल से लेकर पूरी रात्रि तक रहेगा। इन योगों में गणेश पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

विनायक चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त
विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा दोपहर के समय की जाती है। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 19 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। इस दौरान विशेष शुभ-उत्तम मुहूर्त 11 बजकर 03 मिनट से 12 बजकर 21 मिनट तक माना गया है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 22 मिनट से 6 बजकर 16 मिनट तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त इस दिन नहीं होगा।

पंचक और भद्रा में विनायक चतुर्थी का प्रभाव
इस वर्ष की अंतिम विनायक चतुर्थी पर भद्रा और पंचक दोनों का संयोग बन रहा है। भद्रा सुबह 7 बजकर 11 मिनट से दोपहर 1 बजकर 11 मिनट तक रहेगी, लेकिन चूंकि इसका वास पाताल लोक में है, इसलिए इसे पूजा के लिए अशुभ नहीं माना गया है। विनायक चतुर्थी के दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से 1 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। वहीं पंचक का आरंभ शाम 7 बजकर 46 मिनट से होगा, जो अगले दिन 25 दिसंबर की सुबह 7 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। बुधवार से शुरू होने वाला पंचक राज पंचक कहलाता है, जिसे शुभ माना जाता है।

विनायक चतुर्थी का धार्मिक महत्व
विनायक चतुर्थी के दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में शुभता का संचार होता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए उनकी कृपा से सभी संकट दूर होते हैं और कार्यों में सफलता मिलती है। इस दिन पूजा के समय गणेश जी को दूर्वा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। हालांकि शास्त्रों के अनुसार इस दिन चंद्रमा का दर्शन करना वर्जित होता है, क्योंकि इससे दोष लगने की मान्यता है। जो भक्त इस नियम का पालन करते हुए व्रत और पूजा करते हैं, उन्हें भगवान गणेश का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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