शारदीय नवरात्रि सनातन परंपरा में मां दुर्गा की आराधना और शक्ति साधना का पावन पर्व माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस पावन पर्व की शुरुआत कलश स्थापना या घटस्थापना से होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश को सुख, समृद्धि, शुभता और देवी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना विशेष श्रद्धा और सावधानी के साथ की जाती है। यदि आप पहली बार घर में नवरात्रि के दौरान कलश स्थापित करने जा रहे हैं, तो पूजा की सामग्री से लेकर कलश स्थापना और अखंड ज्योत के नियमों की जानकारी पहले से होना उपयोगी रहता है। आइए जानते हैं घटस्थापना से जुड़ी जरूरी बातें।
कलश स्थापना के लिए किन सामग्रियों की आवश्यकता होती है?
कलश स्थापना के लिए सबसे पहले मिट्टी, तांबे या पीतल का कलश लिया जाता है। इसके साथ आम या अशोक के पांच पत्ते, गंगाजल, स्वच्छ जल, जटायुक्त नारियल, कलावा, लाल चुनरी, रोली, अक्षत, जौ और मिट्टी का पात्र रखा जाता है। जौ बोने के लिए साफ मिट्टी और एक चौड़ा मिट्टी का पात्र लिया जाता है। इसे नवरात्रि की पूजा में विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान जौ के अंकुरित होने को घर की सुख-समृद्धि और आने वाले समय के शुभ संकेत से जोड़कर देखा जाता है। अखंड ज्योत के लिए परंपरा में शुद्ध देसी गाय के घी को विशेष माना जाता है। यदि घी उपलब्ध न हो तो तिल के तेल का प्रयोग भी किया जाता है। पूजा सामग्री पहले से व्यवस्थित कर लेने से घटस्थापना के समय किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती।
कलश स्थापना की विधि
नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मां दुर्गा का ध्यान करें। इसके बाद पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लें। जिस स्थान पर कलश स्थापित करना हो, वहां गंगाजल का छिड़काव कर स्थान को पवित्र करें। अब एक पात्र में साफ मिट्टी डालकर उसमें जौ बोएं और हल्का पानी छिड़कें। इसके बाद कलश लें और उस पर रोली से स्वास्तिक बनाकर कलावा बांधें। कलश में स्वच्छ जल भरें और उसमें थोड़ा गंगाजल तथा अक्षत डालें। इसके बाद कलश के मुख पर आम या अशोक के पांच पत्ते रखें। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर स्थापित करें। तैयार कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। इसके बाद दीप या अखंड ज्योत प्रज्वलित कर मां दुर्गा का ध्यान और पूजा करें।
अखंड ज्योत जलाते समय किन बातों का रखें ध्यान?
नवरात्रि में अखंड ज्योत जलाने की भी विशेष परंपरा है। यदि आप अखंड ज्योत जला रहे हैं, तो पूरे नौ दिनों तक उसकी लौ को बुझने से बचाने का प्रयास किया जाता है। दीपक में घी या तेल पर्याप्त मात्रा में रखें और उसे सुरक्षित स्थान पर रखें। पूजा स्थल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। ज्योत के लिए शुद्ध घी या तिल के तेल का प्रयोग किया जा सकता है। कलश और नारियल को स्थापित करते समय पूजा की अपनी पारिवारिक या क्षेत्रीय परंपरा का भी ध्यान रखना चाहिए। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। राहुकाल जैसे अशुभ समय से बचते हुए स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित शुभ समय में कलश स्थापना करना उचित रहता है।
श्रद्धा ही है सबसे महत्वपूर्ण
नवरात्रि की पूजा में विधि-विधान का अपना महत्व है, लेकिन इसके साथ मन की श्रद्धा और भाव भी उतने ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं। मां दुर्गा की आराधना करते समय मन को शांत रखें और घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखें। कलश स्थापना केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नवरात्रि के नौ दिनों की साधना का शुभ आरंभ है। कलश में विराजमान जल, उसके ऊपर स्थापित नारियल और चारों ओर अंकुरित होते जौ भक्तों के लिए शुभता, समृद्धि और देवी शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए नवरात्रि में जब आप कलश स्थापित करें, तो पूरे श्रद्धाभाव से मां दुर्गा का स्मरण करें और प्रार्थना करें कि मां का आशीर्वाद आपके घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखे।