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दिव्य सुधा > अन्य > अपरा एकादशी पर क्या करें और क्या नहीं? व्रत से पहले जरूर जान लें ये जरूरी नियम
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अपरा एकादशी पर क्या करें और क्या नहीं? व्रत से पहले जरूर जान लें ये जरूरी नियम

Ekta Mishra
Last updated: May 12, 2026 3:46 pm
Ekta Mishra
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“अपरा एकादशी 2026 पर भगवान विष्णु की पूजा करते श्रद्धालु, तुलसी दल और दीपक के साथ धार्मिक दृश्य”
अपरा एकादशी पर श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया व्रत भगवान विष्णु की कृपा और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है।
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सनातन धर्म में एकादशी तिथि को बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। हर महीने आने वाली दोनों एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती हैं, लेकिन ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अपरा एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया अपरा एकादशी व्रत व्यक्ति के जीवन के पापों का नाश करता है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देता है। पद्म पुराण में भी इस एकादशी को अत्यंत फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को विष्णुलोक में स्थान प्राप्त होता है।

इस वर्ष अपरा एकादशी का व्रत 13 मई, बुधवार को रखा जाएगा। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, केवल व्रत रखना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि इसके नियमों का पालन करना भी बेहद जरूरी होता है। दशमी तिथि से लेकर द्वादशी तक कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

अपरा एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत के दौरान सात्विकता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसलिए दशमी तिथि यानी व्रत से एक दिन पहले ही तामसिक भोजन का त्याग कर देना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांसाहार और नशीली चीजों का सेवन इस दौरान वर्जित माना गया है।

एकादशी के दिन भूलकर भी चावल नहीं खाने चाहिए। मान्यता है कि इस दिन चावल का सेवन करने से व्रत का पुण्य कम हो जाता है। इतना ही नहीं, परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस नियम का पालन करने की सलाह दी जाती है।

हिंदू धर्म में एकादशी पर तुलसी के पत्ते तोड़ना भी निषिद्ध माना गया है। इसलिए पूजा के लिए तुलसी दल पहले से ही तोड़कर रख लेने चाहिए। द्वादशी तिथि पर पारण के समय भी स्वयं तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन बाल और नाखून काटना भी शुभ नहीं माना जाता। साथ ही व्रती को क्रोध, झूठ, बुराई, लालच और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। अपरा एकादशी के दिन नमक का सेवन करना भी वर्जित माना गया है। कहा जाता है कि ऐसा करने से व्रत खंडित हो सकता है। इसके अलावा व्रती को दिन में अधिक देर तक सोने से बचना चाहिए। यदि संभव हो तो जमीन पर शयन करना शुभ माना गया है। साथ ही इस दिन किसी जरूरतमंद को खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए।

अपरा एकादशी पर क्या करना चाहिए?
अपरा एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूरे दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करना चाहिए।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से ही हो जाती है। इसलिए दशमी के दिन केवल सात्विक भोजन करना चाहिए और मन को शांत रखना चाहिए।

एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करना बेहद शुभ माना गया है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें। साथ ही “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना गया है।

पद्म पुराण में एकादशी पर दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, जल, वस्त्र और जरूरतमंदों को भोजन का दान करना पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

भजन-कीर्तन और जागरण का महत्व
एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की भक्ति के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए इस दिन रात में अधिक सोने के बजाय भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। यदि पूरी रात जागरण संभव न हो, तो मानसिक रूप से भगवान का स्मरण करना भी लाभकारी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि अपरा एकादशी पर सच्चे मन से भगवान विष्णु का ध्यान करने से मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

द्वादशी पर कैसे करें व्रत का पारण?
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर ही करना चाहिए। पारण से पहले सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें भोग अर्पित करें। इसके बाद तुलसी दल के साथ व्रत खोलना शुभ माना गया है। मान्यता है कि पारण के लिए तुलसी दल परिवार के किसी छोटे सदस्य या अन्य व्यक्ति से तुड़वाना चाहिए। स्वयं तुलसी तोड़ने से बचना चाहिए।

अपरा एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
अपरा एकादशी केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सकारात्मक जीवन का संदेश भी देती है। यह व्रत व्यक्ति को संयम, धैर्य और भक्ति का महत्व सिखाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया अपरा एकादशी व्रत जीवन के दुखों को दूर कर सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करता है।

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