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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026: भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, नहीं तो अधूरी रह सकती है गणेश जी की कृपा
व्रत और त्योहार

विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026: भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, नहीं तो अधूरी रह सकती है गणेश जी की कृपा

दिव्यसुधा
Last updated: June 3, 2026 12:30 pm
दिव्यसुधा
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विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 पर भगवान गणेश की पूजा करते श्रद्धालु, व्रत और धार्मिक नियमों का पालन करते हुए।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा में इन 5 गलतियों से बचें, तभी मिलेगा व्रत और पूजा का पूर्ण फल।
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हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे आशीर्वाद लेकर ही की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विभुवन संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन व्रत 3 जून 2026 को रखा जाएगा। इस दिन श्रद्धालु भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और अन्न, धन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। हालांकि, शास्त्रों में कुछ ऐसे कार्य बताए गए हैं जिन्हें इस दिन करने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इन गलतियों के कारण पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता और गणपति बप्पा अप्रसन्न हो सकते हैं।

गणेश जी को तुलसी अर्पित न करें
सनातन परंपरा के अनुसार, भगवान गणेश की पूजा में तुलसी के पत्तों का उपयोग नहीं किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता तुलसी और भगवान गणेश से जुड़ी एक कथा के कारण गणेश जी को तुलसी अर्पित करना वर्जित माना गया है। इसलिए पूजा के दौरान तुलसी की जगह गणेश जी को प्रिय दूर्वा अवश्य अर्पित करें।

चंद्र दर्शन के बाद ही करें व्रत का पारण
संकष्टी चतुर्थी व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन चंद्रोदय होने के बाद चंद्रदेव को दूध और जल से अर्घ्य अर्पित किया जाता है। इसके बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। मान्यता है कि चंद्र दर्शन किए बिना व्रत खोलने से व्रत का पूर्ण पुण्य फल प्राप्त नहीं होता।

तामसिक भोजन से बनाएं दूरी
विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। शुद्ध और सात्विक भोजन ही ग्रहण करना शुभ माना जाता है।

क्रोध और विवाद से बचें
धार्मिक दृष्टि से यह दिन संयम, भक्ति और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए किसी से विवाद करने, क्रोध करने या बड़ों का अपमान करने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस प्रकार के व्यवहार से पूजा का शुभ प्रभाव कम हो सकता है।

काले वस्त्र पहनने से बचें
संकष्टी चतुर्थी के दिन काले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काला रंग नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस दिन स्नान के बाद साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनकर भगवान गणेश की पूजा करना अधिक शुभ फलदायी माना जाता है।

विभुवन संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर है। यदि इस दिन श्रद्धा, नियम और शास्त्रों में बताए गए निर्देशों का पालन किया जाए, तो गणपति बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन की अनेक बाधाएं दूर हो सकती हैं।

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