Wednesday, 6 May 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > सनातन धर्म > भगवान > भगवान श्री कृष्ण
भगवान

भगवान श्री कृष्ण

दिव्यसुधा
Last updated: March 27, 2025 11:32 am
दिव्यसुधा
Share
bhagwan shree krishn
SHARE

श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के 8वें अवतार हैं। उनका जन्म द्वापरयुग में हुआ था। कृष्ण वसुदेव और देवकी की 8वीं संतान थे। देवकी कंस की बहन थी। कंस एक अत्याचारी राजा था। उसने आकाशवाणी सुनी थी कि देवकी के पुत्र द्वारा उसकी मृत्यु होगी। इससे बचने के लिए कंस ने देवकी और वसुदेव को मथुरा के कारागार में डाल दिया। कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र के दिन रात्री के 12 बजे हुआ था। कृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था। वे माता देवकी और पिता वासुदेव की 8वीं संतान थे। कंस के डर से वसुदेव ने नवजात बालक को रात में ही यमुना पार गोकुल में यशोदा के यहाँ पहुँचा दिया। गोकुल में उनका लालन-पालन हुआ था। यशोदा और नन्द उनके पालक माता-पिता बने। पौराणिक कथाओं के अनुसार, कृष्ण का एक भाई और एक बहन थी, बलराम और सुभद्रा।

वसुदेव का पुत्र होने के कारण उनको ‘वासुदेव’ कहा जाता है। “कृष्ण” नाम के अतिरिक्त भी उन्हें कई अन्य नामों से जाना जाता है, जो उनकी कई विशेषताओं को दर्शाते हैं। सबसे व्यापक नामों में मोहन, गोविन्द, माधव,और गोपाल प्रमुख हैं। कृष्ण का चित्रण आमतौर पर विष्णु जैसे कृष्ण, काले या नीले रंग की त्वचा के साथ किया जाता है कृष्ण को अक्सर मोर-पंख वाले पुष्प या मुकुट पहनकर चित्रित किया जाता है, और अक्सर बांसुरी बजाते हुए उनका चित्रण हुआ है। इस रूप में, आम तौर पर त्रिभंग मुद्रा में एक पैर को दुसरे पैर पर डाले चित्रित है। कभी-कभी वह गाय या बछड़ा के साथ होते है, जो चरवाहे गोविंद के प्रतीक को दर्शाती है।

अपने जन्म के कुछ समय बाद ही कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना का वध किया। उसके बाद शकटासुर, तृणावर्त आदि राक्षस का वध किया। बाद में गोकुल छोड़कर नंद गाँव आ गए वहां पर उन्होने गोचारण लीला, गोवर्धन लीला, रास लीला की। इसके बाद मथुरा में मामा कंस का वध किया। सौराष्ट्र में द्वारका नगरी की स्थापना की और वहाँ अपना राज्य बसाया। भागवत पुराण कृष्ण की आठ पत्नियों का वर्णन करता है, इस अनुक्रम में रुक्मिणी, सत्यभामा, जामवंती, कालिंदी, मित्रवृंदा, नाग्नजिती,भद्रा और लक्ष्मणा प्रकट होती हैं। उनकी सभी पत्नियां को और उनकी प्रेमिका राधा को हिंदू परंपरा में विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी के अवतार के रूप में माना जाता है। गोपियों को राधा के कई रूप और अभिव्यक्तियों के रूप में माना जाता है। कृष्ण ने पाण्डवों की मदद की और विभिन्न संकटों से उनकी रक्षा की। महाभारत के युद्ध में उन्होंने अर्जुन के सारथी की भूमिका निभाई और रणक्षेत्र में ही उन्हें उपदेश दिया।

महाभारत के युद्ध के बाद कृष्ण अपने परिवार के साथ रह रहे थे। लेकिन कुछ समय बाद यादव वंश में युद्ध जैसे हालत होने लगे। तो कृष्ण ने समझ लिया परिवार की मर्यादा बचाने के लिए अब सब कुछ छोड़ देना ही अच्छा है इसलिए उन्होंने द्वारिका समुद्र में डुबो दी। द्वारिका डूब जाने के बाद कृष्ण एक पेड़ के नीचे बैठे थे। कृष्ण के पैर के पंजे में एक मणि थी जो दूर से ही चमकती थी एक शिकारी उस चमक को दूर से देख रहा था उसे लगा कोई जानवर है उसने दूर से ही उस चमक पर निशाना लगाकर तीर चला दिया जो सीधा कृष्ण के पैरो पर लगा। इस तीर के जहर के प्रभाव से श्री कृष्ण ने अपना देह त्याग दिया।

TAGGED:humare bhgwanmandirसनातन धर्म
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article maa durga नवरात्रि विशेष… देवी माँ के अलग-अलग वाहनों पर आने का क्या है रहस्य
Next Article maa durga नवरात्रि विशेष… कैसे हुई नवरात्रि की शुरुआत, और किसने रखा सबसे पहले व्रत
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

रंग पंचमी पर भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी को गुलाल अर्पित करते भक्त
अन्य

रंग पंचमी 2026: जानें तिथि, पूजा विधि और भगवान को चढ़ाए जाने वाले शुभ रंगों का महत्व

By Ekta Mishra
महाभारत युद्ध में अर्जुन के सारथी के रूप में श्री कृष्ण
भगवान

  आखिर क्यों महाभारत युद्ध में भगवान श्री कृष्ण ने नहीं उठाया था शस्त्र

By दिव्यसुधा
सनातन धर्म

त्रिपिंडी श्राद्ध : पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति का विशेष अनुष्ठान

By दिव्यसुधा
pradosh vart
व्रत और त्योहार

शिव और शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनि प्रदोष पर अपनाएं ये उपाय

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?