हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। वर्षभर आने वाली 24 एकादशियों में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी को विशेष फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है, रोगों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शास्त्रों में बताया गया है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य प्राप्त होता है।
योगिनी एकादशी 2026 कब है?
इस वर्ष योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को रखा जाएगा। उदया तिथि के अनुसार इसी दिन व्रत करना श्रेष्ठ और शास्त्रसम्मत माना गया है।
योगिनी एकादशी शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ: 09 जुलाई 2026, रात 09:31 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 10 जुलाई 2026, रात 10:11 बजे
व्रत (उदया तिथि): 10 जुलाई 2026, शुक्रवार
पारण का शुभ समय: 11 जुलाई 2026, सुबह 05:40 बजे से 08:24 बजे तक
योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार योगिनी एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। यह व्रत केवल पापों का नाश ही नहीं करता, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य और मानसिक शांति भी प्रदान करता है। मान्यता है कि इस दिन पूरे श्रद्धाभाव से व्रत और पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा उन्हें भगवान विष्णु का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है।
योगिनी एकादशी पूजा विधि
योगिनी एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल पर एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। भगवान को पीले पुष्प, अक्षत, चंदन, फल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें। ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते, इसलिए तुलसी दल एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। इसके बाद घी का दीपक जलाकर विष्णु सहस्रनाम, योगिनी एकादशी व्रत कथा तथा भगवान विष्णु की आरती करें। रात्रि में भजन-कीर्तन एवं भगवान के नाम का स्मरण करते हुए जागरण करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
योगिनी एकादशी पारण का सही समय
एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब द्वादशी तिथि में शुभ मुहूर्त के भीतर पारण किया जाए।
पारण का समय: 11 जुलाई 2026, सुबह 05:40 बजे से 08:24 बजे तक।
पारण करने से पहले भगवान विष्णु की पूजा करें तथा यथाशक्ति किसी ब्राह्मण, गौ या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन एवं दान-दक्षिणा अवश्य दें।
- योगिनी एकादशी के दिन क्या करें?
- भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
- पीले वस्त्र धारण करें।
- भगवान को पीले पुष्प, बेसन के लड्डू, केला और केसरयुक्त प्रसाद अर्पित करें।
- विष्णु सहस्रनाम, गीता एवं विष्णु मंत्रों का जाप करें।
- जल, अन्न, वस्त्र, छाता एवं दक्षिणा का दान करें।
- दिनभर सात्विक भोजन एवं सात्विक विचार रखें।
- यथासंभव रात्रि जागरण कर भगवान का भजन करें।
- योगिनी एकादशी के दिन क्या न करें?
- क्रोध, झूठ और कटु वचन से बचें।
- तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज एवं मांसाहार का सेवन न करें।
- किसी का अपमान या अनादर न करें।
- तुलसी के पत्ते एकादशी के दिन न तोड़ें।
- नकारात्मक विचारों और विवादों से दूर रहें।
योगिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार अलकापुरी के राजा कुबेर के यहां हेम माली नाम का एक सेवक प्रतिदिन मानसरोवर से भगवान शिव की पूजा के लिए पुष्प लाया करता था। एक दिन वह अपनी पत्नी के प्रेम में इतना मग्न हो गया कि समय पर फूल नहीं पहुंचा सका। इससे क्रोधित होकर कुबेर ने उसे श्राप दिया कि वह पृथ्वी पर जाकर कुष्ठ रोग से पीड़ित होगा और पत्नी से वियोग सहन करेगा। श्राप के कारण हेम माली अत्यंत कष्ट भोगता हुआ महर्षि मार्कण्डेय के आश्रम पहुंचा। ऋषि ने उसकी व्यथा सुनकर उसे आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। हेम माली ने पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से उसका कुष्ठ रोग समाप्त हो गया, उसे अपना दिव्य स्वरूप वापस मिला और पत्नी से पुनर्मिलन भी हुआ। इसी कारण माना जाता है कि योगिनी एकादशी का व्रत व्यक्ति को रोग, पाप और जीवन की अनेक बाधाओं से मुक्ति दिलाकर सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।