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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > वृन्दावन का प्राचीन और चमत्कारी श्री राधा मदन मोहन मंदिर
मंदिर

वृन्दावन का प्राचीन और चमत्कारी श्री राधा मदन मोहन मंदिर

दिव्यसुधा
Last updated: May 24, 2026 1:48 pm
दिव्यसुधा
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वृन्दावन स्थित प्राचीन और दिव्य श्री राधा मदन मोहन मंदिर का भव्य दृश्य, जहां भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की पूजा होती है
श्री राधा मदन मोहन मंदिर — वृन्दावन की भक्ति, इतिहास और दिव्यता का अद्भुत संगम।
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उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में स्थित वृन्दावन धाम भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इसी पावन भूमि पर स्थित है श्री राधा मदन मोहन मंदिर, जो वैष्णव संप्रदाय के सबसे प्राचीन और पूजनीय मंदिरों में गिना जाता है। वृन्दावन के सप्तदेवालयों में इस मंदिर को प्रथम स्थान प्राप्त है। अपनी दिव्यता, ऐतिहासिक महत्व और भव्य स्थापत्य के कारण यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

मंदिर का प्राचीन इतिहास
मदन मोहन मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने इस मंदिर की स्थापना कराई थी। हालांकि ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार 15वीं या 16वीं शताब्दी में मुल्तान के व्यापारी रामदास कपूर ने श्री सनातन गोस्वामी के मार्गदर्शन में इस मंदिर का निर्माण करवाया था।

मुगल शासक औरंगजेब के समय कई मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन मदन मोहन मंदिर अपनी मजबूत संरचना के कारण सुरक्षित रहा। हालांकि भगवान मदन मोहन की मूल प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान के करौली में स्थापित कर दिया गया। आज भी वहां उनकी पूजा की जाती है।

चैतन्य महाप्रभु और सनातन गोस्वामी से जुड़ी कथा
करीब पांच सौ वर्ष पहले चैतन्य महाप्रभु वृन्दावन आए थे। उस समय वृन्दावन घने जंगलों से घिरा हुआ था। उन्होंने अपने शिष्यों को भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थलियों की खोज करने का आदेश दिया। उन्हीं शिष्यों में सनातन गोस्वामी भी थे।

एक दिन सनातन गोस्वामी भिक्षा मांगते हुए मथुरा में ओंकार चौबे के घर पहुंचे। वहां उन्होंने एक छोटे बालक को खेलते हुए देखा। जब उन्होंने बालक के बारे में पूछा तो पता चला कि वह यमुना किनारे मिला था और उसका नाम मदन मोहन रखा गया। सनातन गोस्वामी उस बालक को अपने साथ ले आए और साधना करने लगे।

वह ठाकुर जी को बिना नमक की बाटी का भोग लगाते थे। उसी दौरान मुल्तान के व्यापारी रामदास कपूर की नाव यमुना में फंस गई। जब वह सहायता मांगने सनातन गोस्वामी के पास पहुंचे, तब उन्होंने मंदिर निर्माण का संकल्प लिया। मान्यता है कि संकल्प लेते ही उनकी नाव ठीक हो गई और बाद में भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया।

मंदिर की अद्भुत वास्तुकला
मदन मोहन मंदिर उत्तर भारतीय स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह मंदिर लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित है और अपनी भव्यता से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए ऊंची सीढ़ियां बनाई गई हैं।

मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधारानी और ललिता सखी की सुंदर प्रतिमाएं विराजमान हैं। यह मंदिर यमुना नदी से लगभग 50 फीट ऊंचाई पर स्थित है, जबकि इसकी नींव करीब 70 फीट नीचे तक बताई जाती है। इसकी मजबूत संरचना ही कारण है कि औरंगजेब भी इसे पूरी तरह नष्ट नहीं कर सका।

मंदिर की विशेष परंपराएं
वृन्दावन के अधिकांश मंदिरों में प्रतिदिन आरती होती है, लेकिन मदन मोहन मंदिर में विशेष रूप से केवल कार्तिक माह में ही आरती की परंपरा है। यही बात इस मंदिर को अन्य मंदिरों से अलग बनाती है। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय व्यंजन “अंगा कड़ी” का भोग लगाया जाता है। साथ ही सुंदर पुष्प अर्पित कर भक्त भगवान की कृपा प्राप्त करते हैं।

मंदिर दर्शन का समय
गर्मियों में मंदिर सुबह 6 बजे से 11 बजे तक और शाम 5 बजे से 5:30 बजे तक खुलता है। वहीं सर्दियों में मंदिर सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक तथा शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक भक्तों के दर्शन के लिए खुला रहता है।

श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम
श्री राधा मदन मोहन मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि वृन्दावन की आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु भक्ति, शांति और दिव्यता का विशेष अनुभव करता है। यही कारण है कि देश-विदेश से लाखों भक्त इस पावन मंदिर के दर्शन के लिए वृन्दावन पहुंचते हैं।

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