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दिव्य सुधा > अन्य > विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 : गणेश कृपा पाने का दुर्लभ शुभ अवसर
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विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 : गणेश कृपा पाने का दुर्लभ शुभ अवसर

दिव्यसुधा
Last updated: June 2, 2026 1:56 pm
दिव्यसुधा
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भगवान गणेश की पूजा, दूर्वा अर्पण और संकष्टी चतुर्थी व्रत का धार्मिक दृश्य, जो विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 के महत्व को दर्शाता है
विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 – गणपति बप्पा की कृपा पाने का दुर्लभ अवसर
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हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी की आराधना के बिना अधूरी मानी जाती है। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर आने वाली विभुवन संकष्टी चतुर्थी इस वर्ष विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह अधिक मास के शुभ संयोग में पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

तीन वर्ष में एक बार आता है यह दुर्लभ संयोग
विभुवन संकष्टी चतुर्थी को अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी माना गया है। यह चतुर्थी केवल अधिक मास में ही आती है और अधिक मास लगभग तीन वर्ष में एक बार पड़ता है। यही कारण है कि यह विशेष तिथि भी तीन वर्षों में केवल एक बार ही प्राप्त होती है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, अधिक मास को पुरुषोत्तम मास कहा जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होता है। ऐसे पवित्र समय में भगवान गणेश की आराधना करने से साधक को सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक पुण्य और शुभ फल प्राप्त होते हैं।

चंद्र दोष से मुक्ति का शुभ अवसर
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष होता है, उनके लिए विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत और पूजा विशेष लाभदायक मानी गई है। इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से मानसिक तनाव, अस्थिरता और नकारात्मकता में कमी आती है। साथ ही व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सौभाग्य के नए द्वार खुलते हैं। मान्यता है कि गणपति बप्पा की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

शिक्षा और बुद्धि वृद्धि के लिए करें यह उपाय
विभुवन संकष्टी चतुर्थी की रात्रि में भगवान गणेश की पूजा के साथ गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है। विशेष रूप से विद्यार्थियों और बच्चों के लिए यह उपाय लाभकारी बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इसके नियमित पाठ से स्मरण शक्ति, एकाग्रता और ज्ञान प्राप्त करने की क्षमता में वृद्धि होती है। जो विद्यार्थी पढ़ाई में मन लगाने या परीक्षा में सफलता पाने की इच्छा रखते हैं, उनके लिए यह साधना विशेष फलदायी मानी जाती है।

दूर्वा अर्पित करने का महत्व
भगवान गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी को 11 या 21 गांठों वाली ताजी और स्वच्छ दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है। दूर्वा अर्पित करते समय गणेश मंत्र का जप करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

संकटों से मुक्ति के लिए करें यह पाठ
इस पावन तिथि पर संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में बार-बार आने वाली परेशानियां दूर होती हैं और भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। जो लोग किसी लंबे समय से चली आ रही समस्या, आर्थिक संकट या मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह उपाय विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।

विभुवन संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने का एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ अवसर है। अधिक मास में आने वाली यह विशेष चतुर्थी साधकों को आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि और संकटों से मुक्ति का मार्ग प्रदान करती है। श्रद्धा, विश्वास और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से गणपति बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में मंगलमय परिवर्तन आने लगते हैं।

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