राजस्थान की पवित्र धरती पर देवी उपासना की अनगिनत गाथाएं सुनने को मिलती हैं, लेकिन सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा स्थित चौथ माता मंदिर का महत्व सबसे अलग है। यह मंदिर न केवल अपनी ऐतिहासिकता और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि करवा चौथ पर्व से इसका विशेष संबंध माना जाता है। कहा जाता है कि यहां दर्शन और पूजा करने से स्त्रियों को अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है।
इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1451 ईस्वी में की गई थी और इसे गौरी देवी का ही एक रूप माना गया है। करवा चौथ के दिन देशभर की सुहागिनें यहां पहुंचकर चौथ माता की आराधना करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। 700 सीढ़ियां चढ़कर माता के इस दरबार तक पहुंचने वाले भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती।
सीढ़ियां चढ़ने से मिलता है अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद
राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित चौथ का बरवाड़ा शहर अपनी धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थित चौथ माता मंदिर को उत्तर भारत की सुहागिनों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यह मंदिर लगभग 1,000 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जहां तक पहुंचने के लिए भक्तों को करीब 700 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। lकरीब 567 साल पुराना यह मंदिर न केवल अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए, बल्कि अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण भी प्रसिद्ध है। चौथ माता को गौरी देवी का ही स्वरूप माना जाता है। करवा चौथ के दिन यहां भारी संख्या में महिलाएं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचती हैं और अखंड सौभाग्य व पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।
567 साल का इतिहास
चौथ माता मंदिर का निर्माण वर्ष 1451 ईस्वी में सवाई माधोपुर के शासक महाराजा भीम सिंह ने करवाया था। यह धाम आज भी भक्तों के लिए एक शक्तिपीठ के रूप में पूजनीय है। मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है, विशेषकर सुहागिन स्त्रियों की अखंड सौभाग्य और लंबी उम्र की कामना जरूर पूर्ण होती है।
कठिन है 700 सीढ़ियों का सफ़र
चौथ माता मंदिर लगभग 1,000 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जहां माता के दर्शन के लिए भक्तों को 700 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यह कठिन चढ़ाई भक्तों की अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है। ऊंचाई से दिखने वाला मनोहारी दृश्य इस पवित्र स्थल को धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से अद्भुत अनुभव बनाता है।
करवा चौथ से जुड़ा है संबंध
करवा चौथ व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है और यह सीधे तौर पर चौथ माता की पूजा से जुड़ा है। सुहागिन स्त्रियां इस दिन निर्जल व्रत रखकर माता से अखंड सौभाग्य, दीर्घायु पति और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मांगती हैं। चौथ माता, देवी गौरी का स्वरूप मानी जाती हैं, जिनकी पूजा से प्रेम, सामंजस्य और समृद्धि प्राप्त होती है।
मंदिर का स्वरूप
चौथ माता मंदिर, सवाई माधोपुर ज़िले के प्रमुख और प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है। यहां माता चौथ की मुख्य प्रतिमा के साथ भगवान गणेश और भैरव की मूर्तियां भी स्थापित हैं। भक्त मंदिर परिसर में सभी देवताओं की पूजा-अर्चना पूर्ण श्रद्धा से करते हैं। यह स्थान आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है।