हस्तरेखा शास्त्र में हथेली पर मौजूद पर्वतों का विशेष महत्व माना गया है। जिस प्रकार जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य का संकेत देती है, उसी प्रकार हथेली में स्थित ग्रह पर्वत जीवन की दिशा और दशा के बारे में बहुत कुछ बताते हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण स्थान है शनि पर्वत, जो मध्यमा उंगली के मूल में स्थित होता है। यह पर्वत व्यक्ति के भाग्य, कर्म, मेहनत, सफलता और जीवन के संघर्षों को दर्शाता है।
विकसित शनि पर्वत का प्रभाव
यदि हथेली में शनि पर्वत संतुलित और विकसित हो, तो ऐसा व्यक्ति गंभीर, अनुशासित और लक्ष्य केंद्रित होता है। ये लोग एकांतप्रिय हो सकते हैं और अपने कार्य में पूरी निष्ठा से जुटे रहते हैं। बढ़ती उम्र के साथ इनमें आध्यात्मिकता और रहस्यवाद की प्रवृत्ति भी बढ़ सकती है। ऐसे लोग जीवन में मेहनत के बल पर स्थिर और सम्मानजनक स्थान प्राप्त करते हैं।
शनि पर्वत का अभाव
अगर शनि पर्वत अविकसित हो, तो व्यक्ति को जीवन में सफलता और सम्मान पाने के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ता है। मेहनत के बावजूद अपेक्षित परिणाम देर से मिलते हैं, जिससे निराशा भी हो सकती है। ऐसे लोगों को धैर्य और निरंतर प्रयास बनाए रखना आवश्यक होता है।
पूर्ण रूप से विकसित शनि पर्वत
जब शनि पर्वत संतुलित और पूर्ण विकसित हो, तो यह भाग्यशाली होने का संकेत माना जाता है। ऐसे लोग कर्मठ, बचत करने वाले और अचल संपत्ति में विश्वास रखने वाले होते हैं। ये अपने प्रयासों से ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं और जीवन में स्थिरता प्राप्त करते हैं।
अत्यधिक विकसित शनि पर्वत
यदि यह पर्वत अत्यधिक उभरा हुआ हो, तो इसे शुभ संकेत नहीं माना जाता। ऐसे व्यक्तियों को जीवन में बड़े और कभी-कभी जोखिम भरे निर्णय लेने की प्रवृत्ति हो सकती है। इन्हें नकारात्मक या अप्रिय कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।
गुरु या सूर्य की ओर झुकाव
यदि शनि पर्वत गुरु पर्वत की ओर झुका हो, तो व्यक्ति को समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा मिलती है। वहीं, सूर्य की ओर झुकाव भाग्य पर अधिक निर्भरता का संकेत देता है, जिससे आर्थिक उतार-चढ़ाव संभव है।
इस प्रकार, हथेली में शनि पर्वत की स्थिति व्यक्ति के जीवन की दिशा और कर्मफल का महत्वपूर्ण संकेत देती है।