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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > मुजफ्फरपुर का 120 वर्ष पुराना शनिदेव मंदिर : काला छाता चढ़ाने की अनोखी परंपरा
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मुजफ्फरपुर का 120 वर्ष पुराना शनिदेव मंदिर : काला छाता चढ़ाने की अनोखी परंपरा

दिव्यसुधा
Last updated: July 3, 2026 4:47 pm
दिव्यसुधा
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बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित 120 वर्ष पुराने शनिदेव मंदिर में भगवान शनिदेव की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु।
मुजफ्फरपुर के प्राचीन शनिदेव मंदिर में काला छाता अर्पित कर श्रद्धालु भगवान शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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बिहार के मुजफ्फरपुर शहर के गुदरी रोड पर स्थित करीब 120 वर्ष पुराना शनिदेव मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन और श्रद्धा के साथ यहां भगवान शनिदेव की पूजा-अर्चना करते हैं, उनकी शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य शनि दोषों से जुड़ी परेशानियां कम होने लगती हैं। यही कारण है कि प्रत्येक शनिवार और अमावस्या के दिन यहां दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं।

120 वर्ष पुराना है मंदिर का इतिहास
मंदिर के मुख्य पुजारी राजीव कुमार शर्मा के अनुसार इस मंदिर की स्थापना उनके परदादा चुन्नी लाल शर्मा ने लगभग 120 वर्ष पहले की थी। शुरुआत में यह एक छोटा सा मंदिर था, लेकिन समय के साथ श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था और सहयोग से इसका विस्तार होता गया। आज यह मंदिर एक भव्य धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यहां शालिग्राम पत्थर से निर्मित भगवान शनिदेव की दिव्य प्रतिमा विराजमान है, जिसके दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

काला छाता चढ़ाने की अनोखी परंपरा
इस मंदिर की सबसे विशेष पहचान भगवान शनिदेव को काला छाता अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक काला छाता चढ़ाते हैं, उनके जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और शनिदेव की विशेष कृपा बनी रहती है। इसके अलावा भक्त यहां काला तिल, सरसों का तेल, लोहे की कील, लोहे के बर्तन और काले वस्त्र भी अर्पित करते हैं। माना जाता है कि इन वस्तुओं के अर्पण से शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

मंदिर के दर्शन और पूजा का समय
मंदिर के कपाट प्रतिदिन सुबह खुलते हैं और दोपहर 12 बजे तक श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं। इसके बाद शाम 4 बजे दोबारा मंदिर के पट खुलते हैं, जो रात 11 बजे तक खुले रहते हैं। शनिवार और अमावस्या के दिन यहां विशेष पूजा, आरती और दीप प्रज्ज्वलन का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

कलयुग के न्यायाधीश माने जाते हैं शनिदेव
स्थानीय श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भगवान शनिदेव कलयुग के न्यायाधीश हैं और प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसलिए यहां आने वाले भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनी मनोकामना लेकर शनिदेव के चरणों में उपस्थित होते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना और निष्काम भक्ति से शनिदेव भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं और जीवन की कठिनाइयों को दूर करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
मुजफ्फरपुर का यह प्राचीन शनिदेव मंदिर आज केवल बिहार ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां की प्राचीन परंपराएं, काला छाता चढ़ाने की अनूठी मान्यता और शनिदेव के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा इस मंदिर को विशेष पहचान दिलाती है। जो भी श्रद्धालु यहां सच्चे मन से दर्शन और पूजा-अर्चना करता है, वह अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करता है।

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