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दिव्य सुधा > आरती/मंत्र > मां शैलपुत्री की आरती
आरती/मंत्र

मां शैलपुत्री की आरती

दिव्यसुधा
Last updated: March 19, 2026 11:43 am
दिव्यसुधा
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वृषभ पर विराजमान मां शैलपुत्री का दिव्य स्वरूप
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आरती से पाएं सुख-शांति और समृद्धि
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नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। उनका स्वरूप अत्यंत सरल, शांत और पावन माना जाता है। वे हिमालय की पुत्री हैं और वृषभ पर विराजमान रहती हैं। उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल होता है। मां की उपासना से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने का विशेष महत्व है। आरती के माध्यम से भक्त अपनी आस्था प्रकट करते हैं और मां का आशीर्वाद प्राप्त कर जीवन को सुखमय बनाते हैं

मां शैलपुत्री की आरती

शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार।।

शिव शंकर की प्रिय भवानी।

तेरी महिमा किसी ने ना जानी।।

पार्वती तू उमा कहलावे।

जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।।

ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।

दया करे धनवान करे तू।।

सोमवार को शिव संग प्यारी।

आरती तेरी जिसने उतारी।।

उसकी सगरी आस पुजा दो।

सगरे दुख तकलीफ मिला दो।।

घी का सुंदर दीप जला के।

गोला गरी का भोग लगा के।।

श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।

प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।।

जय गिरिराज किशोरी अंबे।

शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।।

मनोकामना पूर्ण कर दो।

भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।।

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