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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > कामाख्या मंदिर के खुले कपाट: अंबुबाची मेले के बाद दर्शन शुरू
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कामाख्या मंदिर के खुले कपाट: अंबुबाची मेले के बाद दर्शन शुरू

दिव्यसुधा
Last updated: June 26, 2026 1:18 pm
दिव्यसुधा
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असम के गुवाहाटी स्थित नीलाचल पर्वत पर अंबुबाची मेले के बाद खुले मां कामाख्या मंदिर के कपाट पर दर्शन करते श्रद्धालु।
अंबुबाची मेले के समापन के बाद खुले मां कामाख्या मंदिर के कपाट, दर्शन के लिए उमड़ी भक्तों की भारी भीड़।
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असम के गुवाहाटी स्थित विश्व प्रसिद्ध मां कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेले के समापन के बाद एक बार फिर भक्तों की आस्था का सैलाब उमड़ने लगा है। तीन दिनों तक पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बंद रहने के बाद शुक्रवार को नित्य पूजा संपन्न होने पर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। इस विशेष अवसर पर देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालु मां के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

अंबुबाची पर्व के दौरान क्यों बंद रहते हैं मंदिर के कपाट?
धार्मिक मान्यता के अनुसार मां कामाख्या वर्ष में एक बार तीन दिनों के लिए वार्षिक रजस्वला अवस्था में प्रवेश करती हैं। इस अवधि को देवी की सृजन शक्ति और प्रकृति की उर्वरता का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना और श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया जाता है। इस वर्ष 22 जून की रात 9 बजकर 08 मिनट 42 सेकंड पर विशेष ‘प्रवृत्ति’ अनुष्ठान के साथ मंदिर के कपाट बंद किए गए थे।

नित्य पूजा के बाद भक्तों के लिए खुले दर्शन के द्वार
तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठानों की पूर्णाहुति के बाद शुक्रवार सुबह विधि-विधान से नित्य पूजा संपन्न की गई। इसके पश्चात मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही भक्तों ने मां कामाख्या के जयकारों के साथ दर्शन किए और देवी का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह क्षण हर श्रद्धालु के लिए अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है।

अंबुबाची मेला: शक्ति साधना का अद्भुत महापर्व
अंबुबाची मेला भारत के सबसे महत्वपूर्ण शक्ति पर्वों में से एक माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति, मातृत्व और सृजन शक्ति के सम्मान का पर्व भी है। तांत्रिक साधना से जुड़े साधु-संत, योगी और आध्यात्मिक साधक इस दौरान विशेष साधना और तपस्या के लिए कामाख्या धाम पहुंचते हैं। इस मेले में देवी शक्ति की उपासना का एक अनूठा स्वरूप देखने को मिलता है, जो पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है।

51 शक्तिपीठों में विशेष स्थान रखता है कामाख्या धाम
गुवाहाटी के नीलाचल पर्वत पर स्थित मां कामाख्या मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख शक्तिपीठ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां माता सती का योनिभाग गिरा था, इसलिए यह स्थान सृजन शक्ति और मातृत्व का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि यह मंदिर तंत्र साधना और शक्ति उपासना का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

श्रद्धालुओं को मिलेगा पवित्र अंगोदक और अंगवस्त्र
मंदिर के पुनः खुलने के बाद श्रद्धालुओं को मां कामाख्या का पवित्र अंगोदक और अंगवस्त्र (अंगबस्त्र) प्रसाद स्वरूप प्रदान किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन पवित्र वस्तुओं को घर में रखने से सुख, समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्त इसे अत्यंत श्रद्धा और विश्वास के साथ ग्रहण करते हैं।

लाखों श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं
अंबुबाची मेले में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु, साधु-संत और पर्यटक शामिल होते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन और असम सरकार ने सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा, पेयजल, ठहरने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत किया है, ताकि सभी श्रद्धालु सुगमता से मां के दर्शन कर सकें।

आस्था, शक्ति और सृजन का अद्वितीय संदेश
मां कामाख्या का अंबुबाची पर्व हमें यह संदेश देता है कि सृजन, मातृत्व और प्रकृति की शक्ति ही जीवन का आधार है। देवी का यह पर्व नारी शक्ति के सम्मान, प्रकृति के प्रति श्रद्धा और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर मां कामाख्या के दर्शन कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

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