Wednesday, 29 Apr 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > सनातन धर्म > भगवान > गणेश जी और बुढ़िया की खीर की कथा
भगवान

गणेश जी और बुढ़िया की खीर की कथा

दिव्यसुधा
Last updated: April 29, 2026 1:28 pm
दिव्यसुधा
Share
गणेश जी बाल रूप में बुढ़िया के घर खीर बनवाते हुए, बड़ा बर्तन खीर से भरता हुआ और परिवार प्रसन्न मुद्रा में।
श्रद्धा और भक्ति से किए गए भोग को भगवान गणेश ने अनंत फल में बदल दिया और बुढ़िया के जीवन में चमत्कार कर दिया।
SHARE

एक बार गणेश जी एक छोटे बालक के रूप में चिमटी में चावल और चमचे में दूध लेकर निकले। वे हर किसी से कह रहे थे—“कोई मेरी खीर बना दो, कोई मेरी खीर बना दो।”एक बुढ़िया बैठी हुई थी। उसने कहा, “ला, मैं बना दूँ।” वह छोटे से बर्तन को चढ़ाने लगी। तब गणेश जी ने कहा, “दादी माँ, छोटी सी भगोनी मत चढ़ाओ, तुम्हारे घर में जो सबसे बड़ा बर्तन हो, वही चढ़ा दो।”बुढ़िया ने वही चढ़ा दिया। वह देखती रह गई कि जो थोड़े से चावल उसने उस बड़े बर्तन में डाले थे, वह पूरा भर गया।गणेश जी ने कहा, “दादी माँ, मैं नहा कर आता हूँ।”खीर तैयार हो गई। बुढ़िया के पोते-पोती खीर खाने के लिए रोने लगे। बुढ़िया ने कहा, “गणेश जी तेरे भोग लगें,” कहकर चूल्हे में थोड़ी सी खीर डाली और कटोरी भर-भरकर बच्चों को दे दी।बुढ़िया की पड़ोसन ऊपर से देख रही थी। बुढ़िया ने सोचा कि कहीं वह चुगली न कर दे, इसलिए उसने उसे भी एक कटोरा खीर दे दिया।

बहू ने चुपके से एक कटोरा खीर खाई

बहू ने चुपके से एक कटोरा खीर खाई और कटोरा चक्की के नीचे छुपा दिया। अभी भी गणेश जी नहीं आए थे। बुढ़िया को भूख लगी तो उसने भी एक कटोरा खीर भरकर कीवाड़ के पीछे बैठकर कहा, “गणेश जी, आपके भोग लगे,” और खाने लगी। तभी गणेश जी आ गए। बुढ़िया ने कहा, “आजा रे गणेस्या, खीर खा ले, मैं तो तेरी ही राह देख रही थी।” गणेश जी बोले, “दादी माँ, मैंने तो खीर पहले ही खा ली।” बुढ़िया ने पूछा, “कब खाई?” गणेश जी बोले, “जब तेरे पोते-पोती ने खाई, तब मैंने खाई; जब तेरी पड़ोसन ने खाई, तब भी खाई; जब तेरी बहू ने खाई, तब भी खाई; और अब तूने खाई तो मेरा पेट पूरा भर गया।” बुढ़िया ने कहा, “बेटा, और सब तो ठीक है, पर बहू तो सुबह से काम कर रही थी, उसने कब खाई?” गणेश जी ने कहा, “चक्की के नीचे देख, झूठा कटोरा पड़ा है।” बुढ़िया बोली, “घर की बात है, घर में ही रहने दो।”

 बुढ़िया ने पूरी नगरी जीमा दी, फिर भी बर्तन पूरा भरा रहा

 गणेश जी बोले, “अब जो बची खीर है, उसे नगरी जीमा दो।” बुढ़िया ने पूरी नगरी जीमा दी, फिर भी बर्तन पूरा भरा रहा। राजा को पता चला तो उसने बुढ़िया से वह बर्तन ले लिया, लेकिन महल में पहुँचते ही उसमें कीड़े-मकोड़े और दुर्गंध भर गई। राजा ने वापस कर दिया। जैसे ही बुढ़िया ने लिया, वह फिर से सुगंधित हो गया। गणेश जी ने कहा, “इस बची खीर को झोपड़ी के कोने में गाड़ दो, सुबह वहाँ धन के दो घड़े मिलेंगे।” इतना कहकर गणेश जी अंतर्ध्यान हो गए। झोपड़ी को उन्होंने लात मारी तो वहाँ महल बन गया।सुबह बहू ने पूरा स्थान खोद दिया, पर कुछ नहीं मिला। सास ने जब सुई से देखा तो वहाँ से दो धन के घड़े निकल आए। सास ने कहा, “गणेश जी भावनाओं के भूखे हैं, जो श्रद्धा से देता है, उसे सब कुछ मिलता है।”

यह कथा हमें सिखाती है कि भगवान भावनाओं के भूखे होते हैं। सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से दिया गया छोटा सा भोग भी अनंत फल देता है। जो भी मन से भगवान को याद करता है, उसकी हर इच्छा पूर्ण होती है।

TAGGED:DivyaSudhahumare bhgwanmandirpanchangrashifalvart tyoharगणेश कथागणेश चतुर्थी कथागणेश जी की लीलाएंधार्मिक कहानीप्रेरक कथाबुढ़िया की खीरभक्ति कथासकारात्मक ऊर्जासनातन धर्महिंदी कथाहिंदू धर्म
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article श्री विष्णु चालीसा का पाठ हिंदी में, भगवान विष्णु की स्तुति और भक्ति भाव से भरा धार्मिक भजन श्री विष्णु चालीसा
Next Article भगवान नरसिंह खंभे से प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का वध करते हुए जानें आखिर भगवान विष्णु ने क्यों लिया नरसिंह का अवतार
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

बच्चा वेस्ट-साउथ-वेस्ट दिशा में बैठकर पढ़ाई करते हुए, पास में सरस्वती माता की तस्वीर और सुव्यवस्थित स्टडी टेबल
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

पढ़ाई में नहीं लगता मन? वास्तु शास्त्र के अनुसार जानें सही दिशा और सफलता के उपाय

By Ekta Mishra
वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन सेटअप सही दिशा चूल्हा सिंक दूरी
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई की सही व्यवस्था: सुख-समृद्धि का आधार

By दिव्यसुधा
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की आराधना करते भक्त, कार्तिक माह संकष्टी व्रत पूजा दृश्य
व्रत और त्योहार

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी 2025: भगवान गणेश की आराधना से मिटेंगे सभी संकट

By दिव्यसुधा
गंगा सप्तमी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा
व्रत और त्योहार

 गंगा सप्तमी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?