लखनऊ। राजधानी लखनऊ के विख्यात लेटे हुए हनुमान जी मंदिर प्रांगण में पंच-दिवसीय श्रीराम कथा का शुभारम्भ धूमधाम और भक्ति भाव से हुआ। कथा व्यास डॉ. विवेक तांगड़ी ने कथा का प्रारम्भ गोस्वामी तुलसीदास जी की संक्षिप्त किंतु प्रेरणादायी जीवनी के साथ किया। उन्होंने बताया कि तुलसीदास जी केवल कवि ही नहीं बल्कि युगपुरुष थे जिन्होंने ‘रामचरितमानस’ जैसी अनुपम कृति रचकर जन-जन को श्रीराम के पथ पर अग्रसर किया। इसके पश्चात मंगलाचरण के साथ कथा का प्रवेश हुआ और पूरा वातावरण राम नाम के मधुर उच्चारण से गूंज उठा।
राम नाम की महिमा
कथा व्यास डॉ. तांगड़ी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम का नाम स्वयं नारायण से भी अधिक महिमामयी है, क्योंकि कलिकाल में मोक्ष प्राप्त करने का यही एकमात्र सरल मार्ग है। उन्होंने तुलसीदास के उस भाव को समझाया जिसमें रामनाम को जीवन का आधार और मुक्ति का साधन बताया गया है।
शिव-पार्वती संवाद और शिव विवाह प्रसंग
पहले दिन की कथा में शिव-पार्वती संवाद का अद्भुत विवरण सुनाया गया। श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा श्रवण करते रहे। इसी क्रम में शिव विवाह का मनोरम प्रसंग आया जिसने वातावरण को भक्ति और उल्लास से भर दिया। इस अवसर पर कपीश्वर वैदिक गुरुकुल के बटुकों द्वारा प्रस्तुत शिव बारात की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। बटुकों ने वैदिक परंपरा का जीवंत प्रदर्शन कर उपस्थित भक्तों को अतीत की झलक दिखलाई।
छप्पन भोग का भव्य आयोजन
कथा के प्रमुख यजमान डॉ. पंकज सिंह भदौरिया ने बताया कि कथा के प्रथम दिवस पर छप्पन भोग का प्रसाद अर्पित किया गया। भक्तों ने आरती और भोग के दर्शन कर आत्मिक आनंद की अनुभूति की। कथा के पश्चात प्रसाद वितरण हुआ जिसमें सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया।
दूसरा दिन होगा विशेष
कथा व्यास डॉ. विवेक तांगड़ी ने जानकारी दी कि द्वितीय दिवस की कथा में राम जन्म का अद्भुत प्रसंग और प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं का मनोहर वर्णन किया जाएगा। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण के लिए उपस्थित होने का आग्रह किया।
भक्तों की उमड़ी भीड़
इस शुभ अवसर पर अनेक गणमान्यजन और भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रमुख रूप से डॉ. अलकेश सोती, प्रमित सिंह, ऋद्धि किशोर गौड़, निर्मल सिंह सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंदिर परिसर भक्ति और आध्यात्मिकता से सराबोर हो उठा।
कथा का महत्व
श्रीराम कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि जीवन मूल्यों की शिक्षा भी है। कथा में सुनाए गए प्रसंग हमें मर्यादा, भक्ति, त्याग और धर्म के पथ पर चलने की प्रेरणा देते हैं। आयोजकों का मानना है कि ऐसी कथाओं से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नई पीढ़ी को अपने मूल्यों और संस्कृति से जोड़ने का अवसर मिलता है। पहले दिन की कथा ने भक्तों के हृदय में भक्ति रस और राम नाम का संचार कर दिया। आने वाले चार दिनों में यह कथा भक्तों के लिए और भी अद्भुत अनुभव लेकर आएगी।