भारतीय ज्योतिष, वेद और पौराणिक ग्रंथों में बृहस्पति ग्रह को अत्यंत उच्च स्थान प्राप्त है। सूर्य जहां देवताओं के राजा माने गए हैं, वहीं बृहस्पति को देवताओं का गुरु, मार्गदर्शक और नवग्रहों का मंत्री कहा गया है। बृहस्पति को सम्मान, ज्ञान, धर्म, शिक्षा, संतान, विवाह और सौभाग्य का कारक माना जाता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति मजबूत अवस्था में होते हैं, तो उसका जीवन सुख, समृद्धि और सम्मान से भर जाता है। लेकिन ऐसा क्या है जो गुरु को ‘मंत्री ग्रह’ बनाता है? यह रहस्य भारतीय ज्ञान विज्ञान में गहराई से समझाया गया है।
देवताओं के प्रमुख सलाहकार — देवगुरु बृहस्पति
पौराणिक कथाओं में बृहस्पति को देवताओं का गुरु कहा गया है। वे इंद्र सहित सभी देवताओं के आध्यात्मिक मार्गदर्शक, शिक्षक और रणनीतिक सलाहकार हैं। असुरों और दैत्यों के अत्याचारों से बचने के लिए देवगण हमेशा बृहस्पति से मार्गदर्शन प्राप्त करते थे। वे अपनी बुद्धि और आध्यात्मिक शक्ति से देवताओं को सही नीति, धर्म और विजय का मार्ग बताते थे। जैसे एक योग्य मंत्री राजा को सही दिशा दिखाता है, उसी प्रकार बृहस्पति देवलोक में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी कारण उन्हें ‘नवग्रहों का मंत्री’ कहा गया है।
ज्ञान, विवेक और धर्म के स्वामी
बृहस्पति का संबंध ज्ञान, धर्म, अध्यात्म, वेद, शिक्षा और उच्च बुद्धिमत्ता से है। ग्रहों में ऐसा कोई ग्रह नहीं है जिसका प्रभाव बृहस्पति जितना शुभ और विस्तारकारी हो। ज्योतिष में यह माना जाता है कि जहां गुरु बैठते हैं, वहां वृद्धि, प्रसार, सद्भाव और शुभता बढ़ती है। मंत्री पद के लिए सबसे आवश्यक गुण होता है ज्ञान और विवेक और बृहस्पति में यह गुण अपनी उच्चतम अवस्था में पाए जाते हैं। इसी कारण उन्हें देवताओं का मंत्री कहा जाता है।
समृद्धि, विस्तार और सौभाग्य का प्रतीक
बृहस्पति न केवल धर्म के कारक हैं, बल्कि वे समृद्धि और सौभाग्य के भी ग्रह माने जाते हैं। वे जिस भाव में बैठते हैं, वहां शुभ अवसर बढ़ते हैं। उनकी दृष्टि बहुत प्रभावशाली होती है, जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है। उनका मंत्री पद केवल मार्गदर्शन तक सीमित नहीं, बल्कि यह देवताओं के राज्य में संतुलन, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
न्याय, सदाचार और नीति के संरक्षक
ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति नीति, सत्य, न्याय और धर्म के रक्षक हैं। वे व्यक्ति को सही निर्णय लेने और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। मंत्री का कार्य भी यही है कि वह सत्य और न्याय की रक्षा करे। इसलिए बृहस्पति का बलवान होना जीवन में स्थिरता, सम्मान और सफलता की कुंजी माना गया है।
देवगुरु बृहस्पति के प्रसन्न होने से होने वाले लाभ
जिस व्यक्ति की कुंडली में गुरु शुभ और मजबूत होते हैं, उसके जीवन में अनेक सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। ऐसा व्यक्ति धन–समृद्धि, उच्च शिक्षा, सम्मान, वैवाहिक सुख और योग्य संतान का भाग्यशाली माना जाता है। गुरु के आशीर्वाद से भाग्य मजबूत होता है और व्यक्ति कठिन परिस्थितियों से सहजता से निकल जाता है। समाज में उसका मान-सम्मान बढ़ता है और उसके निर्णय सही सिद्ध होते हैं।
गुरुवार का महत्व और गुरु को प्रसन्न करने के उपाय
गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। इस दिन किए गए उपाय बहुत ही प्रभावी माने जाते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। गुरुवार को पीली वस्तुओं का दान विशेष फलदायी होता है। चने की दाल, पीला वस्त्र, हल्दी, गुड़ और केले का दान करने से धन लाभ, समृद्धि और भाग्य की वृद्धि होती है। बृहस्पति से जुड़े केले के पेड़ की पूजा इस दिन अत्यंत शुभ मानी जाती है। पेड़ को जल चढ़ाना और दीपक जलाना गुरु को प्रसन्न करता है।
इस दिन पीले वस्त्र धारण करना, व्रत रखना और भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। विष्णु सहस्रनाम, सत्यनारायण कथा या “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करने से गुरु कमजोर होने पर भी शुभ फल देने लगते हैं। अपने गुरु, बुजुर्गों और शिक्षकों का सम्मान करना भी बृहस्पति को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ उपाय माना गया है।