हिंदू धर्म में कालाष्टमी का पर्व भगवान शिव के रौद्र स्वरूप भगवान काल भैरव को समर्पित माना जाता है। हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर काल भैरव की पूजा करने से भय और नकारात्मकता दूर होती है तथा जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। आश्विन माह की कालाष्टमी इस बार 3 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जाएगी।
आश्विन कालाष्टमी 2026 की तिथि
पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को सुबह 7:59 बजे शुरू होगी और 4 अक्टूबर को सुबह 5:51 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार कालाष्टमी का व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा। शनिवार का दिन होने के कारण इस बार कालाष्टमी का धार्मिक महत्व और भी विशेष माना जा रहा है।
कालाष्टमी पर ऐसे करें काल भैरव की पूजा
कालाष्टमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान काल भैरव तथा भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। शाम के समय पूजा की तैयारी करें। पूजा स्थल पर लाल या काला कपड़ा बिछाकर भगवान काल भैरव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
इसके बाद भगवान के सामने सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाएं। पूजा में काले तिल, उड़द की दाल, फल, मिठाई, अक्षत, चंदन और फूल अर्पित किए जा सकते हैं। भगवान काल भैरव के मंत्रों का जाप करने के साथ कालाष्टमी व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती करें और श्रद्धापूर्वक अपनी मनोकामना भगवान के समक्ष रखें।
कालाष्टमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान काल भैरव का प्राकट्य भगवान शिव के अंश से हुआ था। उन्हें काल का स्वामी और काशी का ‘कोतवाल’ कहा जाता है। मान्यता है कि काल भैरव की उपासना करने से व्यक्ति के भीतर का भय दूर होता है और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। कई धार्मिक मान्यताओं में काल भैरव की पूजा को जीवन की बाधाओं से मुक्ति और सुख-शांति से भी जोड़ा गया है। वहीं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव की आराधना से शनि तथा राहु-केतु से संबंधित अशुभ प्रभावों को शांत करने में सहायता मिलती है। हालांकि, इन मान्यताओं को धार्मिक और ज्योतिषीय विश्वास के रूप में ही देखा जाता है। कालाष्टमी केवल व्रत और पूजा का अवसर नहीं, बल्कि भगवान शिव के उग्र स्वरूप का स्मरण कर भय पर विजय, आत्मबल और आध्यात्मिक साधना का संदेश देने वाला पर्व भी है। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई उपासना भक्त के मन में सकारात्मकता और विश्वास का संचार करती है।