साल 2025 में पौष माह की संकष्टी चतुर्थी अत्यंत शुभ संयोग लेकर आ रही है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, यह व्रत 7 दिसंबर 2025 को शाम 6:24 बजे से शुरू होकर 8 दिसंबर 2025 को शाम 4:03 बजे समाप्त होगा। इस दिन भगवान गणेश की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि गणेश जी की कृपा से जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
संकष्टी चतुर्थी का महत्त्व
हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूजनीय देवता कहा गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से होती है। पूर्णिमा के बाद आने वाली चौथी तिथि को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन व्रत करने से मन की शंकाएँ मिटती हैं, कठिनाइयाँ दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है।
संकष्टी चतुर्थी 2025 तिथि और समय
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 7 दिसंबर 2025, शाम 6:24 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 8 दिसंबर 2025, शाम 4:03 बजे
- उपवास विधि: सूर्योदय से चंद्रोदय तक
- व्रत खोलना: चंद्रोदय के बाद गणेश जी को अर्घ्य देकर
पूजा-विधि और व्रत के नियम
इस दिन भक्त सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं और गणेश जी का धूप-दीप, अक्षत, दूर्वा, मोदक और लाल फूलों से पूजन करते हैं। दिनभर निराहार या फलाहार व्रत रखा जाता है। शाम को गणेश जी के चित्र या मूर्ति के सामने दीप जलाकर आरती की जाती है। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण किया जाता है।
आखिर क्यों माना जाता है यह व्रत इतना शुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत जीवन में आ रही हर परेशानी को दूर करने में सहायक माना जाता है। यह व्रत न केवल मनोकामनाओं को पूर्ण करता है बल्कि मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करता है। पौष माह की संकष्टी चतुर्थी 2025 आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए यह व्रत अवश्य करना चाहिए। सही विधि से किए गए पूजन से जीवन में सौभाग्य और सफलता प्राप्त होती है।