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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > उत्तर भारत का अद्भुत अष्टादश भुजा महालक्ष्मी मंदिर: जहां पूरी होती हैं हर मनोकामनाएं
मंदिर

उत्तर भारत का अद्भुत अष्टादश भुजा महालक्ष्मी मंदिर: जहां पूरी होती हैं हर मनोकामनाएं

दिव्यसुधा
Last updated: May 7, 2026 4:19 pm
दिव्यसुधा
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बेरीपड़ाव स्थित अष्टादश भुजा महालक्ष्मी मंदिर में विराजमान मां महालक्ष्मी की 18 भुजाओं वाली दिव्य प्रतिमा
हल्द्वानी के बेरीपड़ाव में स्थित अष्टादश भुजा महालक्ष्मी मंदिर भक्तों की आस्था और शक्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
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उत्तराखंड के हल्द्वानी से सटे बेरीपड़ाव में स्थित अष्टादश भुजा महालक्ष्मी मंदिर अपनी दिव्यता और अनोखी आस्था के लिए पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध है। यह मंदिर मां महालक्ष्मी के 18 भुजाओं वाले दुर्लभ स्वरूप के कारण विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि जो भी भक्त यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करता है, मां उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और जीवन में धन-धान्य तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। यह मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र भी माना जाता है। सफेद रंग के भव्य गुंबदों से सजा यह मंदिर दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मंदिर परिसर में मां महालक्ष्मी के साथ भगवान शिव, भगवान गणेश और हनुमान जी के मंदिर भी स्थापित हैं, जिससे यह स्थान हर भक्त के लिए विशेष बन जाता है।

बालकृष्ण यतिधाम के नाम से भी है प्रसिद्ध
अष्टादश भुजा महालक्ष्मी मंदिर की स्थापना तपस्वी संत एवं महामंडलेश्वर श्री-श्री 1008 बालकृष्ण यति महाराज द्वारा कराई गई थी। इसी कारण इस पवित्र धाम को “बालकृष्ण यतिधाम” के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2004 में भूमि पूजन के साथ मंदिर की नींव रखी गई थी। इसके बाद 2005-2006 में मंदिर और आश्रम परिसर का निर्माण कार्य पूरा हुआ। 20 अप्रैल 2007 को मां अष्टादश भुजा महालक्ष्मी की प्रतिमा की विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा की गई। तभी से यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।

नवरात्रि में उमड़ती है भक्तों की भारी भीड़
मंदिर के महामंडलेश्वर सोमेश्वर यति जी महाराज के अनुसार, नवरात्रि, दीपावली और अन्य शुभ अवसरों पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। इन पावन दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही श्रीमद्देवीभागवत महापुराण का संगीतमय आयोजन भी होता है, जिसमें मां की महिमा और शक्ति का विस्तारपूर्वक वर्णन किया जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है।

मां महालक्ष्मी का दिव्य स्वरूप
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता मां महालक्ष्मी की 18 भुजाओं वाली दिव्य प्रतिमा है। यह स्वरूप शक्ति, समृद्धि और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। मां के प्रत्येक हाथ में अलग-अलग आयुध और दिव्य वस्तुएं हैं, जो भक्तों के जीवन से संकट दूर करने और सुख-समृद्धि प्रदान करने का संदेश देती हैं। मंदिर का शांत वातावरण और भक्ति से भरी आरती श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव कराती है। यहां आने वाले भक्त केवल दर्शन ही नहीं करते, बल्कि मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा का भी अनुभव करते हैं।

श्रद्धा का केंद्र बना यह पवित्र धाम
कहा जाता है कि मां महालक्ष्मी का यह दिव्य धाम भक्तों के जीवन से आर्थिक परेशानियां दूर कर खुशहाली और समृद्धि प्रदान करता है। यही कारण है कि उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। अष्टादश भुजा महालक्ष्मी मंदिर आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, शक्ति और आध्यात्मिक विश्वास का प्रतीक बन चुका है।

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