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दिव्य सुधा > ग्रह-नक्षत्र > वृषभ संक्रांति 2026: तुला, कुंभ और मीन राशि पर सूर्य गोचर का प्रभाव
ग्रह-नक्षत्र

वृषभ संक्रांति 2026: तुला, कुंभ और मीन राशि पर सूर्य गोचर का प्रभाव

दिव्यसुधा
Last updated: May 17, 2026 12:00 pm
दिव्यसुधा
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वृषभ संक्रांति के दौरान सूर्य देव का राशि परिवर्तन और तुला, कुंभ, मीन राशि पर प्रभाव
सूर्य देव के वृषभ राशि में गोचर और रोहिणी नक्षत्र के प्रभाव से तुला, कुंभ और मीन राशि के जीवन में बढ़ सकती हैं चुनौतियां।
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ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को ग्रहों का राजा माना गया है और उनका राशि परिवर्तन अत्यंत महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे संक्रांति कहा जाता है। इस बार सूर्य देव ने मेष राशि की अपनी यात्रा पूर्ण कर वृषभ राशि में प्रवेश किया है, जिसे वृषभ संक्रांति कहा जा रहा है। सूर्य आत्मा, मान-सम्मान, सरकारी कार्य, पिता और स्वास्थ्य के प्रमुख कारक माने जाते हैं, इसलिए उनका यह गोचर सभी राशियों पर गहरा प्रभाव डालता है।

इस बार का सूर्य गोचर केवल राशि परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह और भी विशेष हो गया है क्योंकि सूर्य देव चंद्रमा के स्वामित्व वाले रोहिणी नक्षत्र में भी प्रवेश कर चुके हैं। चंद्रमा के नक्षत्र में सूर्य का यह संयोग मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति पर सीधा प्रभाव डालता है। इसका असर लोगों के विचारों, निर्णय क्षमता और रिश्तों पर भी देखने को मिलता है। इस दौरान कुछ राशियों के लिए समय अनुकूल रहेगा, लेकिन कुछ को विशेष सावधानी रखने की आवश्यकता होगी।

तुला राशि: अचानक उतार-चढ़ाव और आर्थिक सावधानी

तुला राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर अष्टम भाव में प्रभाव डाल रहा है। ज्योतिष में यह भाव अचानक घटनाओं, छिपी समस्याओं और परिवर्तन से जुड़ा माना जाता है। रोहिणी नक्षत्र के प्रभाव से पुराने विवाद या छिपे हुए शत्रु फिर से सक्रिय हो सकते हैं, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

आर्थिक मामलों में विशेष सतर्कता बरतना जरूरी होगा। इस समय किसी को भी बड़ा कर्ज देने या लेने से बचें। शेयर बाजार, नए व्यापार या किसी बड़े निवेश में जल्दबाजी बिल्कुल न करें, क्योंकि नुकसान की संभावना बनी हुई है। धैर्य और सोच-समझकर लिए गए निर्णय ही आपको सुरक्षित रखेंगे।
उपाय: प्रतिदिन सुबह तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करें और अर्घ्य दें।


कुंभ राशि: घरेलू तनाव और भावनात्मक अस्थिरता
कुंभ राशि के लिए सूर्य का यह गोचर चतुर्थ भाव में हो रहा है, जो सुख, माता और पारिवारिक जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। इस समय सूर्य की उग्र ऊर्जा घर-परिवार में तनाव या मतभेद की स्थिति पैदा कर सकती है। पारिवारिक वातावरण थोड़ा अस्थिर रह सकता है।

रोहिणी नक्षत्र के प्रभाव से भावनात्मक उतार-चढ़ाव भी बढ़ सकते हैं। कभी अधिक गुस्सा तो कभी अत्यधिक भावुकता, यह स्थिति रिश्तों में गलतफहमियां पैदा कर सकती है। ऐसे में वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी होगा।
उपाय: रविवार के दिन गाय को गेहूं और गुड़ अवश्य खिलाएं।


मीन राशि: कार्यक्षेत्र में चुनौती और सावधानी जरूरी
मीन राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर तृतीय भाव में हो रहा है, जो साहस और पराक्रम का भाव माना जाता है। हालांकि इस समय सूर्य और शुक्र की स्थिति तथा रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव मिश्रित परिणाम दे सकता है।

इस अवधि में कार्यक्षेत्र में आत्मविश्वास की कमी महसूस हो सकती है और सहकर्मियों के साथ तालमेल बिगड़ सकता है। इसका असर आपकी कार्यस्थल पर छवि पर भी पड़ सकता है। किसी भी नए अनुबंध या बड़े निर्णय में जल्दबाजी करना नुकसानदायक साबित हो सकता है।
उपाय: प्रतिदिन सूर्य देव को जल अर्पित करें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।

यह वृषभ संक्रांति का समय सभी राशियों के लिए अलग-अलग अनुभव लेकर आएगा। ऐसे में संयम, धैर्य और आध्यात्मिक उपायों का पालन करना ही इस अवधि को संतुलित और सकारात्मक बनाने का सबसे सही मार्ग है।

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