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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > अपरा एकादशी 2026: सही तिथि, महत्व और पूजा विधि
व्रत और त्योहार

अपरा एकादशी 2026: सही तिथि, महत्व और पूजा विधि

दिव्यसुधा
Last updated: May 3, 2026 12:14 pm
दिव्यसुधा
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भगवान विष्णु की पूजा और अपरा एकादशी व्रत की विधि, पूजा सामग्री और धार्मिक अनुष्ठान दर्शाता चित्र
अपरा एकादशी: विष्णु कृपा पाने का पावन व्रत
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ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है, जिसका सनातन धर्म में अत्यंत विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और मान्यता है कि इसे श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर जीवन के बड़े से बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों में इस एकादशी को पापों से मुक्ति दिलाने वाली और पुण्य प्रदान करने वाली बताया गया है, इसलिए इसे “अपरिमित फल देने वाली एकादशी” भी कहा जाता है।

अपरा एकादशी 2026 कब है?
पंडितों की गणना के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी तिथि का आरंभ 12 मई 2026 को दोपहर 2 बजकर 53 मिनट से होगा और इसका समापन 13 मई को दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार व्रत हमेशा उस दिन रखा जाता है जब सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान हो। इस आधार पर अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा। वहीं, व्रत का पारण 14 मई को द्वादशी तिथि में सुबह 11 बजकर 20 मिनट से पहले करना शुभ रहेगा।

अपरा एकादशी का महत्व
अपरा एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। पुराणों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से ब्रह्म हत्या जैसे महापापों से भी मुक्ति मिल सकती है। साथ ही यह व्रत व्यक्ति को प्रेत योनि जैसे कष्टों से बचाता है और उसे मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक उन्नति देता है, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और शांति भी लाता है। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

अपरा एकादशी पूजा विधि
अपरा एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थल को साफ कर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। एक लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान को विराजमान करें। फिर जल से आचमन कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का अभिषेक करें और उन्हें वस्त्र, पुष्प और तुलसी अर्पित करें।

पूजा के दौरान घी का दीपक जलाकर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें। भगवान को माखन-मिश्री या फल का भोग लगाएं। इसके पश्चात अपरा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और अंत में आरती कर प्रसाद सभी में वितरित करें। पूरे दिन व्रत रखते हुए भगवान का स्मरण करें और अगले दिन द्वादशी तिथि में विधि अनुसार पारण करें।

अपरा एकादशी केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक सशक्त माध्यम है। यह हमें संयम, श्रद्धा और भक्ति का महत्व सिखाती है। जो व्यक्ति इस व्रत को पूरी निष्ठा और विश्वास के साथ करता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं और वह आध्यात्मिक रूप से भी उन्नति प्राप्त करता है।

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