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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > वैशाख अमावस्या 2026: स्नान, दान और पितृ तर्पण से मिलेगा विशेष पुण्य
व्रत और त्योहार

वैशाख अमावस्या 2026: स्नान, दान और पितृ तर्पण से मिलेगा विशेष पुण्य

दिव्यसुधा
Last updated: April 16, 2026 1:42 pm
दिव्यसुधा
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वैशाख अमावस्या 2026 पर स्नान, दान और पितृ तर्पण करते श्रद्धालु
वैशाख अमावस्या पर स्नान और दान से मिलता है विशेष पुण्य
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हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन वैशाख मास में आने वाली अमावस्या और भी अधिक फलदायी मानी जाती है। इसे पितरों को समर्पित दिन माना गया है, जब उनके लिए किए गए कर्म विशेष फल देते हैं। मान्यता है कि इस दिन स्नान, दान और तर्पण करने से अनजाने में हुए पापों का नाश होता है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

वैशाख अमावस्या 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, वैशाख अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 अप्रैल 2026, गुरुवार को रात 8 बजकर 12 मिनट पर होगी और इसका समापन 17 अप्रैल, शुक्रवार को शाम 5 बजकर 22 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार 17 अप्रैल को ही स्नान, दान और पितृ कर्म करना श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन सुबह का समय विशेष रूप से शुभ रहेगा, जब आध्यात्मिक ऊर्जा अधिक प्रभावी होती है।

शुभ मुहूर्त और स्नान का महत्व
वैशाख अमावस्या के दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 53 मिनट पर होगा। लाभ चौघड़िया सुबह 7:30 से 9:07 तक और अमृत चौघड़िया 9:07 से 10:43 तक रहेगा। इस दौरान किए गए कार्य अत्यंत शुभ माने जाते हैं। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना विशेष फलदायी माना गया है। यदि नदी स्नान संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से भी समान पुण्य प्राप्त होता है।

पितरों को प्रसन्न करने के उपाय
वैशाख अमावस्या के दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए तर्पण और दान का विशेष महत्व है। स्नान के बाद काले तिल और जल से तर्पण करना चाहिए। साथ ही ‘ॐ सर्व पितृ देवाय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए श्रद्धा से पितरों का स्मरण करना चाहिए। इससे पितृ दोष शांत होता है और जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

इस दिन जरूरतमंद लोगों को काले तिल, छाता, जल से भरे घड़े या सत्तू का दान करना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। यह न केवल पितरों को प्रसन्न करता है, बल्कि जीवन में समृद्धि और शांति भी लाता है।

पीपल पूजा और दीपदान का महत्व
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल के वृक्ष में देवताओं और पितरों का वास होता है। इसलिए वैशाख अमावस्या के दिन सुबह तर्पण के बाद और शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक अवश्य जलाना चाहिए। इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

भगवान विष्णु की पूजा का महत्व
अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा कर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति मिलती है।

वैशाख अमावस्या 2026 आत्मशुद्धि, पितृ तर्पण और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ से न केवल पितरों का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि भी बढ़ती है। यह दिन हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और अपने जीवन को सकारात्मक दिशा देने का अवसर प्रदान करता है।

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