भारत आस्था, परंपरा और चमत्कारों की भूमि है। यहां ऐसे अनेक धार्मिक स्थल हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं न केवल आध्यात्मिक बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ी हुई हैं। इन्हीं में से एक है उत्तर प्रदेश के बनारस यानी काशी में स्थित लोलार्क कुंड मंदिर, जहां स्नान मात्र से त्वचा संबंधी अनेक समस्याओं से राहत मिलने की मान्यता है।
काशी में स्थित है लोलार्क कुंड का पवित्र धाम
काशी को विश्व की सबसे प्राचीन जीवित नगरी माना जाता है। इसी पावन नगरी में तुलसी घाट और अस्सी घाट के बीच संकरी गलियों में स्थित है लोलार्क कुंड। यह कुंड केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि सूर्य उपासना से जुड़ा एक अत्यंत प्राचीन और श्रद्धेय धार्मिक स्थल है। दूर-दराज़ से श्रद्धालु यहां स्नान और पूजा के लिए आते हैं।
लोलार्क कुंड का नाम और ऐतिहासिक महत्व
लोलार्क कुंड का संबंध भगवान सूर्य के एक विशेष स्वरूप लोलार्क आदित्य से माना जाता है। ‘लोलार्क’ शब्द का अर्थ होता है “कांपता हुआ सूर्य”। मान्यता है कि इस कुंड के जल में सूर्य की किरणें कंपन करती हुई प्रतीत होती हैं, इसी कारण इसका यह नाम पड़ा। यह कुंड लगभग एक हजार वर्ष से भी अधिक पुराना बताया जाता है और काशी के प्राचीनतम तीर्थों में इसकी गिनती होती है।
कुंड की संरचना और अहिल्याबाई होल्कर का योगदान
लोलार्क कुंड आयताकार आकार का है और इसमें तीन दिशाओं से नीचे उतरने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। इतिहासकारों के अनुसार 18वीं शताब्दी में मराठा शासिका महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने इस कुंड का जीर्णोद्धार कराया था। उनके प्रयासों से यह कुंड आज भी सुरक्षित और सुदृढ़ स्थिति में दिखाई देता है।
स्नान से दूर होती हैं त्वचा की समस्याएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लोलार्क कुंड में स्नान करने से त्वचा रोगों से राहत मिलती है। कहा जाता है कि इस कुंड का जल सूर्य तत्व से युक्त है, जो शरीर को शुद्ध करता है। इसके साथ ही यहां स्नान करने से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलने की भी मान्यता है, इसी कारण अनेक दंपति विशेष रूप से यहां दर्शन और स्नान के लिए आते हैं।
लोलार्क षष्ठी का विशेष पर्व
लोलार्क कुंड से जुड़ा सबसे प्रमुख पर्व लोलार्क षष्ठी या लोलार्क छठ है, जो भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन हजारों श्रद्धालु कुंड में स्नान कर सूर्य देव की पूजा करते हैं। कई भक्त स्नान के बाद अपने वस्त्र, फल या सब्जी कुंड में अर्पित कर जीवन भर उस वस्तु का त्याग करने का संकल्प लेते हैं।
पौराणिक मान्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा
स्कंद पुराण के काशी खंड में लोलार्क कुंड का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि यहां पूजा और स्नान करने से जीवन के कष्ट कम होते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। आज भी यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
लोलार्क कुंड केवल एक मंदिर या कुंड नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और परंपरा का जीवंत प्रतीक है। काशी आने वाला हर श्रद्धालु यहां स्नान कर सूर्य देव का आशीर्वाद पाने की कामना करता है और इसी विश्वास के साथ यहां से मानसिक और आध्यात्मिक शांति लेकर लौटता है।