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दिव्य सुधा > वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा > कोविदार वृक्ष का महत्व: वास्तु के अनुसार दिशा, लाभ और धार्मिक मान्यता
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

कोविदार वृक्ष का महत्व: वास्तु के अनुसार दिशा, लाभ और धार्मिक मान्यता

दिव्यसुधा
Last updated: November 28, 2025 3:21 pm
दिव्यसुधा
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कोविदार वृक्ष का धार्मिक महत्व और वास्तु में इसका शुभ प्रभाव
सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य लाने वाला पवित्र कोविदार वृक्ष
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हिंदू धर्म में कोविदार वृक्ष को अत्यंत पवित्र और दिव्य माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस विशेष वृक्ष का निर्माण स्वयं ऋषि कश्यप ने किया था जो मंदार और पारिजात नामक दिव्य वृक्षों का संयोजन है। ऋषि कश्यप को देवताओं का पिता कहा गया है, इसलिए कोविदार वृक्ष को “देव वृक्ष” भी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार- यह वृक्ष सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। अयोध्या राम मंदिर के ध्वज पर भी सूर्य ॐ के साथ कोविदार का चित्र अंकित है। जो इसके दिव्य महत्व को और भी उच्च स्थान प्रदान करता है।

घर में कोविदार वृक्ष लगाने का महत्व
कई ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि घर में कोविदार वृक्ष लगाने से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और परिवार के सदस्यों पर देवताओं की कृपा बनी रहती है। यह वृक्ष घर में सौभाग्य का प्रवेश कराता है और जीवन में स्थिरता, समृद्धि और मानसिक शांति लाता है। कोविदार वृक्ष की हरियाली वातावरण को शांत, शुद्ध और ऊर्जावान बनाती है जिससे घर में सकारात्मक तरंगों का संचार होता है।

वास्तु के अनुसार कोविदार वृक्ष की सर्वश्रेष्ठ दिशा
वास्तुशास्त्र के अनुसार, कोविदार वृक्ष को पूर्व दिशा में लगाना सबसे शुभ माना गया है। यह दिशा सूर्य देव की ऊर्जा से जुड़ी होती है। पूर्व दिशा में यह वृक्ष लगाने से घर में दिव्य प्रकाश का संचार होता है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। इससे परिवार के सदस्यों की सेहत, मानसिक शांति और ऊर्जा स्तर बेहतर रहते हैं।

जब पूर्व दिशा न हो उपलब्ध: उत्तर दिशा का महत्व
यदि किसी कारण से कोविदार वृक्ष को पूर्व दिशा में नहीं लगा पा रहे हों, तो इसे उत्तर दिशा में भी स्थापित किया जा सकता है। उत्तर दिशा कुबेर देव की दिशा मानी जाती है जो समृद्धि और धन का प्रतीक है। उत्तर दिशा में यह वृक्ष लगाने से घर में आर्थिक स्थिरता आती है आय के नए स्रोत बनते हैं और धन-संबंधी समस्याएं कम होती हैं।

कोविदार वृक्ष लगाने के महत्वपूर्ण नियम
घर में इस पवित्र वृक्ष को लगाते समय कुछ नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

पहला नियम – कोविदार को घर की दीवारों से उचित दूरी पर लगाना चाहिए, क्योंकि समय के साथ यह वृक्ष बड़ा हो जाता है और दीवारों को छूने पर सूर्यप्रकाश रुक सकता है।

दूसरा नियम- वृक्ष के आसपास साफ-सफाई रखना बेहद जरूरी है। स्वच्छ और हरा-भरा पेड़ सौभाग्य लाता है इसलिए इसे नियमित जल देते रहना चाहिए।

तीसरा नियम – यदि वृक्ष सूख जाए या इसके पत्ते खराब हो जाएं, तो इसे तुरंत हटा देना चाहिए। वास्तु के अनुसार- सूखे पौधे घर में नकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं।

चौथा नियम – इसे मुख्य द्वार के ठीक सामने नहीं लगाना चाहिए। मेन गेट के सामने किसी वृक्ष का होना वास्तुदोष माना जाता है जो ऊर्जा के प्रवाह को बाधित करता है।

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