हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना एक सुंदर और सुखद घर हो, जहां परिवार के साथ खुशहाल जीवन बिताया जा सके। आज के समय में अधिकांश लोग स्वतंत्र मकान की बजाय फ्लैट खरीदना पसंद करते हैं। यदि आप भी नया फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं और वास्तु शास्त्र में आस्था रखते हैं, तो पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार कुछ बातों का ध्यान रखना शुभ माना जाता है। हालांकि, यह भी ध्यान रखें कि वास्तु संबंधी मान्यताओं के वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन खुला, रोशनीदार और हवादार घर स्वास्थ्य और आराम की दृष्टि से निश्चित रूप से बेहतर माना जाता है।
मुख्य प्रवेश द्वार का रखें विशेष ध्यान
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि यदि फ्लैट का प्रवेश द्वार उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में हो, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। यही कारण है कि फ्लैट खरीदते समय मुख्य द्वार की दिशा पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
प्राकृतिक रोशनी और हवा वाला फ्लैट चुनें
किसी भी घर में सूर्य का प्रकाश और ताजी हवा केवल वास्तु की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद आवश्यक मानी जाती है। ऐसा फ्लैट चुनें जहां पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और अच्छा वेंटिलेशन हो। इससे घर में नमी, सीलन और बंद वातावरण जैसी समस्याएं कम होती हैं तथा घर अधिक सकारात्मक और सुखद महसूस होता है।
रसोई और बेडरूम की दिशा
पारंपरिक वास्तु मान्यताओं के अनुसार रसोई का स्थान दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) दिशा में शुभ माना जाता है, क्योंकि यह अग्नि तत्व से जुड़ी दिशा मानी जाती है। वहीं मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में हो तो परिवार में स्थिरता, आपसी सामंजस्य और मानसिक शांति बनी रहने की मान्यता है।
बाथरूम की स्थिति भी मानी जाती है महत्वपूर्ण
वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर-पूर्व दिशा में बाथरूम या शौचालय होना उचित नहीं माना जाता। हालांकि आधुनिक अपार्टमेंट में निर्माण पहले से तय होता है, फिर भी यदि आपके पास विकल्प हो तो इन बातों पर विचार किया जा सकता है।
फ्लैट खरीदते समय इन बातों को बिल्कुल न भूलें
वास्तु के साथ-साथ व्यावहारिक पहलुओं पर भी बराबर ध्यान देना आवश्यक है। फ्लैट खरीदने से पहले बिल्डर की विश्वसनीयता, सभी कानूनी दस्तावेज़, प्रोजेक्ट की स्वीकृति और रेरा (RERA) पंजीकरण की जांच अवश्य करें। साथ ही पानी, बिजली, सुरक्षा, पार्किंग और आसपास की आवश्यक सुविधाओं की जानकारी भी लें। अपने कुल बजट में रजिस्ट्रेशन, स्टांप ड्यूटी, मेंटेनेंस और अन्य अतिरिक्त खर्चों को भी शामिल करें।