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दिव्य सुधा > अन्य > कार्तिक पूर्णिमा 2025 : शिववास और अमृतसिद्धि योग के दुर्लभ संयोग में मनाई जाएगी देव दीपावली
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कार्तिक पूर्णिमा 2025 : शिववास और अमृतसिद्धि योग के दुर्लभ संयोग में मनाई जाएगी देव दीपावली

दिव्यसुधा
Last updated: November 3, 2025 5:06 pm
दिव्यसुधा
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कार्तिक पूर्णिमा 2025 पर शिववास और अमृतसिद्धि योग में मनाई जा रही देव दीपावली
शिववास और अमृतसिद्धि योग में जगमगाएगी देव दीपावली — कार्तिक पूर्णिमा 2025 का दिव्य पर्व
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हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि का अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 5 नवंबर 2025, बुधवार को मनाया जाएगा। विशेष बात यह है कि इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर शिववास और अमृतसिद्धि योग का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।

शिववास और अमृतसिद्धि योग का शुभ प्रभाव

पंडितों के अनुसार, जब कार्तिक पूर्णिमा के दिन शिववास होता है, तब भगवान शिव की पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। इस दिन शिव पूजन, जलाभिषेक और दीपदान करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वहीं, अमृतसिद्धि योग ऐसा योग है जिसमें किए गए सभी कार्य सफल माने जाते हैं। इस दिन आरंभ किया गया कोई भी शुभ कार्य दीर्घकाल तक सकारात्मक परिणाम देता है। इसलिए कहा जा सकता है कि इस वर्ष की देव दीपावली अत्यंत शुभ योग में मनाई जाएगी।

स्नान, दान और दीपदान का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान और दान से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। शाम के समय दीपदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। पवित्र नदियों — जैसे गंगा, यमुना, गोदावरी और नर्मदा — में लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए एकत्रित होते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन अन्न, वस्त्र और धन दान करने से व्यक्ति को स्वर्गीय पुण्य की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस दिन किया गया दान मृत्यु के बाद भी आत्मा के साथ रहता है और स्वर्ग में भी फल प्रदान करता है।

पंचांग के अनुसार तिथि और योग

पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 4 नवंबर मंगलवार की रात 10:36 बजे से प्रारंभ होकर 5 नवंबर बुधवार शाम 6:49 बजे तक रहेगी। इसी दिन उदया तिथि के अनुसार व्रत और देव दीपावली मनाई जाएगी। इस पूर्णिमा को भद्रा काल का भी आंशिक प्रभाव रहेगा, जो बुधवार सुबह 8:44 बजे तक रहेगा। हालांकि यह भद्रिका कहलाती है, जो विशेष रूप से अशुभ नहीं मानी जाती।

त्रिपुरी पूर्णिमा की पौराणिक कथा

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक दैत्य का वध किया था। इसके बाद वे त्रिपुरारी कहलाए। इसी दिन चंद्रमा जब आकाश में उदित होता है, तब शिव, प्रीति और क्षमा पूजन करने से भगवान शिव विशेष प्रसन्न होते हैं।

इस प्रकार, 5 नवंबर 2025 की कार्तिक पूर्णिमा न केवल देव दीपावली के रूप में बल्कि शिववास और अमृतसिद्धि योग के संयोग के कारण भी अत्यंत पावन और फलदायी रहेगी। इस दिन स्नान, दान और दीपदान करने से जीवन में समृद्धि, पवित्रता और ईश्वरीय कृपा की प्राप्ति होती है।

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