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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > रमा एकादशी 2025: दीपावली से पहले रखें मां लक्ष्मी और विष्णु जी का व्रत, जानिए पूजा विधि, तिथि और महत्व
व्रत और त्योहार

रमा एकादशी 2025: दीपावली से पहले रखें मां लक्ष्मी और विष्णु जी का व्रत, जानिए पूजा विधि, तिथि और महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: October 15, 2025 4:05 pm
दिव्यसुधा
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रमा एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हुए भक्त
रमा एकादशी 2025 पर मां लक्ष्मी और विष्णु जी की आराधना से आती है सुख-समृद्धि
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हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। प्रत्येक महीने में दो बार आने वाली एकादशी तिथि को अत्यंत शुभ माना जाता है। यह व्रत श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। इसे दीपावली से पहले मनाने की परंपरा है और यह व्रत घर में सुख-समृद्धि, शांति और सौभाग्य लाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

रमा एकादशी के दिन श्रद्धालु दिनभर व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं। इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रमा एकादशी व्रत करने से हजार अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।

रमा एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त:
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2025 में रमा एकादशी 17 अक्टूबर, शुक्रवार को पड़ रही है। एकादशी तिथि 16 अक्टूबर की सुबह 10:35 बजे से शुरू होकर 17 अक्टूबर की सुबह 11:12 बजे तक रहेगी। इस अनुसार उदया तिथि के आधार पर व्रत 17 अक्टूबर को रखा जाएगा। रमा एकादशी का पारण 18 अक्टूबर 2025 को सुबह 6:24 से 8:41 बजे के बीच किया जाएगा।

रमा एकादशी पूजा विधि:
रमा एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर पीले या सफेद वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल को पहले गंगाजल से शुद्ध करें। उसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा के दौरान चंदन, पुष्प, तुलसी पत्र, धूप, दीप और फल अर्पित करें। भक्त “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें। इस दिन श्रीसूक्त और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

रमा एकादशी के दिन भोजन में अनाज, प्याज, लहसुन और सरसों का तीखा मसाला सेवन वर्जित होता है। दिनभर उपवास रखकर श्रद्धालु भगवान की आराधना करते हैं और कथा सुनते हैं। शाम को व्रत रखने वाली महिलाएं विशेष रूप से पूजा और कथा का आयोजन करती हैं। अगले दिन पारण के समय जल अर्पित करके व्रत खोलना चाहिए।

रमा एकादशी का महत्व:
रमा एकादशी दीपावली से पहले आने वाला एक अत्यंत शुभ अवसर है। यह व्रत घर में धन-धान्य, सुख, शांति और समृद्धि लाने का मार्ग बताता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन किया गया व्रत व्यक्ति के जीवन के सभी पापों को नष्ट करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

यह व्रत न केवल आर्थिक और भौतिक लाभ देता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति भी प्रदान करता है। रमा एकादशी का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह दिवाली से पूर्व आने वाली अंतिम महत्वपूर्ण तिथि है, जो भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम अवसर है।

अतः श्रद्धालु इस दिन व्रत और पूजा के माध्यम से अपने जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक जागरूकता ला सकते हैं। रमा एकादशी का पालन करने से जीवन में नकारात्मकता कम होती है, आत्मा की शुद्धि होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

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