दीपावली का पर्व हिन्दू धर्म में धन, सुख-समृद्धि और वैभव का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर अधिकांश लोग अपने घर में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। इसी क्रम में मां लक्ष्मी का यंत्र घर में स्थापित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यंत्र की सही स्थापना से घर में स्थायी लक्ष्मी का वास होता है और आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं। लेकिन यदि यह यंत्र शास्त्रों के अनुसार स्थापित न किया जाए, तो इसका नकारात्मक प्रभाव भी हो सकता है। इसलिए जानना जरूरी है कि दिवाली पर यंत्र स्थापना के लिए कौन-कौन से नियम और विधियाँ पालन करनी चाहिए।
मां लक्ष्मी यंत्र की स्थापना का स्थान
यंत्र स्थापित करने के लिए घर की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) सबसे शुभ मानी जाती है। यह वह दिशा है जहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सबसे अधिक होता है। यंत्र स्थापना से पहले घर की पूरी सफाई करें और जिस स्थान पर यंत्र रखा जाएगा उसे गंगाजल या गौमूत्र से शुद्ध करें।
यंत्र स्थापना की विधि
• यंत्र को ताम्र या स्वर्ण पर अंकित होकर लाल या पीले वस्त्र पर स्थापित करें।
• यंत्र के साथ रोलि, चावल, गुलाल, पुष्प, धूप-दीप, दूध, शहद, दही, गंगाजल अर्पित करें।
• यंत्र को चांदी या तांबे की थाली में रखें और पूजन स्थल पर स्थापित करें।
• मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र के सामने यंत्र रखें।
• धूप-दीप जलाएं और पुष्प अर्पित करें।
• “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
• माता को खीर, मिश्री या मीठा प्रसाद अर्पित करें।
यंत्र स्थापना के शुभ मुहूर्त
दीपावली की अमावस्या की संध्या या प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद 6:30 से 8:30 बजे तक) यंत्र स्थापित करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस समय यंत्र स्थापना करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
यंत्र स्थापना के नियम और सावधानियां
• यंत्र को कभी भी गंदे हाथों से न छुएँ।
• इसे सीधे जमीन पर न रखें, हमेशा लाल या पीले कपड़े पर ही रखें।
• हर शुक्रवार को दीपक जलाकर यंत्र के सामने लक्ष्मी मंत्र का जप करें।
• यंत्र के आसपास कभी भी कूड़ा-कचरा, जूते-चप्पल न रखें।
यदि दीपावली पर मां लक्ष्मी के यंत्र की स्थापना विधिवत की जाए, तो यह घर में स्थायी समृद्धि, धनवृद्धि और सौभाग्य का कारक बन जाता है। मां लक्ष्मी की कृपा से जीवन में न केवल आर्थिक उन्नति होती है, बल्कि घर में शांति, सुख और सकारात्मक ऊर्जा का वास भी होता है।