भारत में माता रानी के अनेक प्राचीन और आस्था से जुड़े मंदिर हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित मां बगदाई मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए विशेष माना जाता है। यहां माता रानी को नारियल, मिठाई या फल नहीं, बल्कि पांच पत्थर और एक फूल अर्पित करने की परंपरा है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, मां बगदाई वन की जागृत देवी हैं और लंबे समय से जंगल तथा आसपास रहने वाले लोगों की रक्षा करती आ रही हैं। घने जंगल के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक शांति का महत्वपूर्ण केंद्र है।
पांच पत्थर चढ़ाने की क्या है मान्यता?
स्थानीय लोककथा के अनुसार, करीब सौ वर्ष पहले एक चरवाहे को जंगल में माता की प्रतिमा के दर्शन हुए। मान्यता है कि माता ने उसके स्वप्न में आकर प्रतिमा स्थापित करने का निर्देश दिया। चरवाहे ने माता की प्रतिमा स्थापित कर एक छोटा मंदिर बनवा दिया। जब माता को भोग चढ़ाने की बात आई, तो चरवाहे के पास कोई सामग्री नहीं थी। उसकी श्रद्धा देखकर माता ने उसे पांच पत्थर और एक फूल अर्पित करने को कहा। मान्यता है कि माता ने भक्त के भोग से अधिक उसके सच्चे प्रेम और श्रद्धा को महत्व दिया। तभी से मंदिर में पांच पत्थर और फूल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। स्थानीय विश्वास है कि मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु दोबारा मंदिर पहुंचकर पांच पत्थर और फूल चढ़ाते हैं।
नवरात्रि में उमड़ते हैं श्रद्धालु
चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान मां बगदाई मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और माता का भव्य श्रृंगार किया जाता है। इन दिनों दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और मंदिर परिसर में मेले का आयोजन भी होता है। घने जंगल, प्राकृतिक वातावरण और अनोखी पूजा परंपरा के कारण मां बगदाई मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक आकर्षण रखता है। यहां की सबसे बड़ी सीख यही है कि ईश्वर के लिए भोग से अधिक महत्वपूर्ण भक्त की सच्ची श्रद्धा और भावना होती है।