Thursday, 20 Aug 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > सावन का अंतिम सोमवार 2026: 5 शुभ संयोग और पूजा मुहूर्त
व्रत और त्योहार

सावन का अंतिम सोमवार 2026: 5 शुभ संयोग और पूजा मुहूर्त

दिव्यसुधा
Last updated: August 20, 2026 2:55 pm
दिव्यसुधा
Share
सावन का अंतिम सोमवार 24 अगस्त 2026 और भगवान शिव की पूजा
24 अगस्त को सावन का अंतिम सोमवार, जानें भगवान शिव के जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के शुभ मुहूर्त।
SHARE

सावन का चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। भगवान शिव को समर्पित सावन का यह अंतिम सोमवार भक्तों के लिए विशेष माना जा रहा है। इस दिन कई शुभ योग और धार्मिक संयोग बन रहे हैं, जिसके चलते शिव पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व रहेगा। मान्यता है कि सावन सोमवार पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्तों को भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है। वहीं, जो श्रद्धालु पूरे सावन सोमवार का व्रत रखते हैं, उनके लिए अंतिम सोमवार व्रत के उद्यापन का भी अवसर होता है। जो लोग अब तक शिवलिंग का जलाभिषेक नहीं कर पाए हैं, वे भी इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।

अंतिम सावन सोमवार पर बन रहे 5 शुभ संयोग

24 अगस्त को सावन के अंतिम सोमवार के साथ कई शुभ संयोग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन संयोगों में भगवान शिव की आराधना, अभिषेक और मंत्र जाप विशेष फलदायी माने जाते हैं।

सावन पुत्रदा एकादशी का संयोग
अंतिम सावन सोमवार के दिन सावन पुत्रदा एकादशी से जुड़ा विशेष संयोग रहेगा। गृहस्थ श्रद्धालु एकादशी व्रत का पारण निर्धारित समय के अनुसार करेंगे, जबकि वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु एकादशी व्रत रखेंगे। इस दिन भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की पूजा को भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि शिव और हरि की आराधना से जीवन में सुख, शांति और कल्याण की प्राप्ति होती है।

प्रीति योग
अंतिम सावन सोमवार पर प्रीति योग भी बन रहा है। यह योग सुबह से लेकर सुबह 7 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में प्रीति योग को शुभ और सकारात्मक माना जाता है। इस दौरान किए गए शुभ कार्यों से जीवन में प्रेम, सौहार्द और सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है। भगवान शिव की पूजा और अभिषेक के लिए भी इस समय को शुभ माना जा सकता है।

आयुष्मान योग
प्रीति योग समाप्त होने के बाद सुबह 7 बजकर 04 मिनट से आयुष्मान योग शुरू होगा, जो पूरे दिन रहने की बात कही गई है। ज्योतिषीय मान्यताओं में आयुष्मान योग को स्वास्थ्य, दीर्घायु और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इस दिन भगवान शिव का अभिषेक करते समय अपने और परिवार के उत्तम स्वास्थ्य तथा दीर्घायु की कामना की जा सकती है।

कैलाश पर भगवान शिव का वास
धार्मिक पंचांग परंपराओं में भगवान शिव के विभिन्न वास का उल्लेख मिलता है। अंतिम सावन सोमवार पर भगवान शिव का कैलाश वास माना जा रहा है। मान्यता है कि जब भगवान शिव का वास कैलाश पर हो, तब उनकी पूजा और रुद्राभिषेक करना विशेष शुभ होता है। भक्त इस अवसर पर शिवलिंग का जल, दूध और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक कर सकते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार, रुद्राभिषेक से सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मकता की प्राप्ति होती है।

हंसराज योग
इस दिन हंसराज योग का भी संयोग बताया जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति के कर्क राशि में स्थित होने से यह योग बनता है। इसे उन्नति और ज्ञान से जुड़ा शुभ योग माना जाता है। इसके साथ ही इस दिन चंद्रमा धनु राशि और सूर्य सिंह राशि में स्थित होंगे। ऐसे में सावन के अंतिम सोमवार को शिव आराधना के लिए विशेष माना जा रहा है।

अंतिम सावन सोमवार पर जलाभिषेक का शुभ समय

सावन के अंतिम सोमवार पर भगवान शिव का जलाभिषेक ब्रह्म मुहूर्त से किया जा सकता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:27 बजे से 5:11 बजे तक रहेगा।
इसके अलावा शुभ समय इस प्रकार हैं—
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 5:55 बजे से 7:32 बजे तक
शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 9:09 बजे से 10:46 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक
हालांकि, भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए किसी विशेष मुहूर्त की अनिवार्यता नहीं मानी जाती। भक्त अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार दिन में किसी भी समय शिवलिंग पर जल अर्पित कर सकते हैं।

अंतिम सोमवार पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव का ध्यान करें। इसके बाद शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें। सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार दूध, दही, शहद आदि से अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित करें तथा ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में भगवान शिव से परिवार के सुख, स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें। जो श्रद्धालु सावन सोमवार का व्रत रखते आए हैं, वे अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक विधि के अनुसार अंतिम सोमवार को व्रत का उद्यापन भी कर सकते हैं।

अंतिम सावन सोमवार क्यों है खास?
सावन का अंतिम सोमवार भगवान शिव के भक्तों के लिए श्रद्धा और साधना का विशेष अवसर है। इस दिन बनने वाले शुभ संयोगों के साथ शिव पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और मंत्र जाप का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। हालांकि, सभी शुभ योगों और उनके फल से जुड़ी बातें ज्योतिषीय एवं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें आस्था के दृष्टिकोण से ही देखना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण है भगवान शिव के प्रति सच्ची श्रद्धा, भक्ति और सात्विक भाव।

Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में धन और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के उपाय पैसा क्यों नहीं टिकता? जानें वास्तु के आसान उपाय
Next Article बिलासपुर के मां बगदाई मंदिर में पांच पत्थर और फूल अर्पित करते श्रद्धालु मां बगदाई मंदिर: जहां माता को चढ़ाए जाते हैं पांच पत्थर
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

मां शैलपुत्री वृषभ पर विराजमान, हाथ में त्रिशूल और कमल लिए दिव्य स्वरूप
व्रत और त्योहार

चैत्र नवरात्रि 2026: पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से मिलेगी शक्ति, शांति और आत्मविश्वास

By Ekta Mishra
maa shail putri
व्रत और त्योहार

नवरात्रि विशेष… चैत्र नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री की कथा

By दिव्यसुधा
व्रत और त्योहार

हरियाली तीज पर क्यों पहनते हैं हरा रंग, जानिए इसके पीछे का कारण और धार्मिक महत्व

By दिव्यसुधा
आदि शंकराचार्य जयंती 2025
व्रत और त्योहार

आदि शंकराचार्य जयंती 2025: जानें तिथि, पूजा विधि और इसका आध्यात्मिक महत्व

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?