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दिव्य सुधा > आरती/मंत्र > मां धूमावती की आरती: लाभ, पूजा विधि और महत्व
आरती/मंत्र

मां धूमावती की आरती: लाभ, पूजा विधि और महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: June 21, 2026 1:24 pm
दिव्यसुधा
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मां धूमावती की आरती का आध्यात्मिक चित्रण, जिसमें देवी का रहस्यमय स्वरूप, धूप-दीप और भक्तों की श्रद्धा को दर्शाया गया है।
मां धूमावती की आरती भक्तों को भय, संकट और बाधाओं से मुक्ति दिलाती है।
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सनातन धर्म में मां धूमावती को दस महाविद्याओं में सातवां स्थान प्राप्त है। उनका स्वरूप रहस्यमय, तेजस्वी और अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। मां धूमावती को दुख, दरिद्रता, शत्रु बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और जीवन के संकटों का नाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ मां धूमावती की आराधना करता है, उसके जीवन में आने वाली अनेक परेशानियां दूर होती हैं और उसे मानसिक शक्ति तथा आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।

मां धूमावती का स्वरूप अन्य देवियों से अलग माना जाता है। वे वैराग्य, त्याग और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक हैं। उनकी पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी मानी जाती है जो जीवन में लगातार संघर्ष, भय या बाधाओं का सामना कर रहे हों। मां की कृपा से साधक को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है।

श्री धूमावती माता की आरती

ॐ जय धूम्रवर्णा, मैया जय धूम्रवर्णा।
श्वेत वस्त्र पर राजत, महिमा अति पूर्णा॥

कौवे की ध्वजा विराजे, रथ पर हो आसीना।
हाथ सूप है सोहत, गले मुण्ड प्रवीणा॥

मस्तक सिन्दूर सोहत, नयना अति लाला।
पीताम्बर तन साजे, मुण्डन की माला॥

दुष्टन को भयकारी, भक्तन हितकारी।
उड़द दाल की खिचड़ी, भोग लगे प्यारी॥

जो ध्यावे तुमको, सो नर सुख पावे।
धूमावती मैया की आरती जो कोई गावे॥

ॐ जय धूम्रवर्णा, मैया जय धूम्रवर्णा॥

मां धूमावती की पूजा का महत्व
धार्मिक ग्रंथों में मां धूमावती को ऐसी देवी बताया गया है जो अपने भक्तों को विपत्तियों से बचाती हैं और उन्हें साहस प्रदान करती हैं। उनकी आरती का नियमित पाठ करने से मन की अशांति दूर होती है तथा नकारात्मक विचारों और भय से मुक्ति मिलती है। मां धूमावती की कृपा से साधक को आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव होता है।

पूजा विधि और विशेष भोग
मां धूमावती को उड़द दाल की खिचड़ी का भोग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। पूजा के दौरान स्वच्छता, श्रद्धा और एकाग्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उनकी साधना तांत्रिक परंपरा से भी जुड़ी हुई है, इसलिए विशेष अनुष्ठान योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना उचित माना जाता है। सामान्य भक्त श्रद्धा पूर्वक आरती और मंत्र जाप करके भी माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

मां धूमावती की आरती केवल स्तुति नहीं, बल्कि देवी की कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम मानी जाती है। जो भक्त सच्चे मन से उनका स्मरण और आरती करता है, उसके जीवन के भय, संकट और बाधाएं दूर होती हैं तथा सुख, शांति और आध्यात्मिक बल की प्राप्ति होती है। मां धूमावती अपने भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखें, यही प्रार्थना है। 🙏

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