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दिव्य सुधा > आरती/मंत्र > श्री गायत्री चालीसा: माँ गायत्री की दिव्य आराधना, लाभ और महत्व
आरती/मंत्र

श्री गायत्री चालीसा: माँ गायत्री की दिव्य आराधना, लाभ और महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: May 22, 2026 1:54 pm
दिव्यसुधा
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माँ गायत्री की दिव्य छवि और भक्तों द्वारा चालीसा पाठ करते हुए आध्यात्मिक वातावरण
श्री गायत्री चालीसा का पाठ जीवन में शांति, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
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श्री गायत्री माता चालीसा माँ गायत्री की भक्ति और आराधना का एक अत्यंत पावन और शक्तिशाली माध्यम है। यह चालीसा भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा, शांति, ज्ञान और सकारात्मकता प्रदान करती है। माँ गायत्री को वेदों की जननी, ज्ञान की देवी और समस्त सृष्टि की प्रेरक शक्ति माना गया है। उनकी कृपा से जीवन के सभी कष्ट दूर होकर सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।

माँ गायत्री का स्मरण करने से मन की अशुद्धियाँ दूर होती हैं और बुद्धि में प्रकाश का संचार होता है। जो भी श्रद्धापूर्वक इस चालीसा का पाठ करता है, उसके जीवन में नयी ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुल जाता है।

श्री गायत्री चालीसा
॥ दोहा ॥
ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा जीवन ज्योति प्रचण्ड।
शान्ति कान्ति जागृत प्रगति रचना शक्ति अखण्ड॥
जगत जननी मङ्गल करनि गायत्री सुखधाम।
प्रणवों सावित्री स्वधा स्वाहा पूरन काम॥

॥ चौपाई ॥
भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी। गायत्री नित कलिमल दहनी॥
अक्षर चौविस परम पुनीता। इनमें बसें शास्त्र श्रुति गीता॥

शाश्वत सतोगुणी सत रूपा। सत्य सनातन सुधा अनूपा॥
हंसारूढ श्वेताम्बर धारी। स्वर्ण कान्ति शुचि गगन-बिहारी॥

पुस्तक पुष्प कमण्डलु माला। शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला॥
ध्यान धरत पुलकित हिय होई। सुख उपजत दुःख दुर्मति खोई॥

कामधेनु तुम सुर तरु छाया। निराकार की अद्भुत माया॥
तुम्हरी शरण गहै जो कोई। तरै सकल संकट सों सोई॥

सरस्वती लक्ष्मी तुम काली। दिपै तुम्हारी ज्योति निराली॥
चार वेद की मात पुनीता। तुम ब्रह्माणी गौरी सीता॥

महामन्त्र जितने जग माहीं। कोउ गायत्री सम नाहीं॥
सृष्टि बीज जग जननि भवानी। कालरात्रि वरदा कल्याणी॥

सकल सृष्टि की प्राण विधाता। पालक पोषक नाशक त्राता॥
मन्द बुद्धि ते बुधि बल पावें। रोगी रोग रहित हो जावें॥

दरिद्र मिटै कटै सब पीरा। नाशै दुःख हरै भव भीरा॥
सन्तति हीन सुसन्तति पावें। सुख संपति युत मोद मनावें॥

भूत पिशाच सबै भय खावें। यम के दूत निकट नहिं आवें॥
जो सतगुरु सो दीक्षा पावे। सो साधन को सफल बनावे॥

अष्ट सिद्धि नवनिधि की दाता। सब समर्थ गायत्री माता॥
जो जो शरण तुम्हारी आवें। सो सो मन वांछित फल पावें॥

॥ दोहा ॥
यह चालीसा भक्ति युत पाठ करै जो कोई।
तापर कृपा प्रसन्नता गायत्री की होय॥

माँ गायत्री चालीसा का महत्व
माँ गायत्री चालीसा का नियमित पाठ करने से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। यह मन को शांत करती है, बुद्धि को तेज बनाती है और आत्मिक शक्ति को जागृत करती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया पाठ सभी प्रकार के भय, रोग और बाधाओं को दूर करता है।माँ गायत्री की कृपा से जीवन में प्रकाश, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

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