रीवा, आस्था और प्रशासन का अद्भुत संगम एक बार फिर प्रयागराज की पावन धरती पर देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ माघ मेला 2026 के अवसर पर संगम तट पहुंचे। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम में उन्होंने विधि-विधान के साथ पवित्र स्नान कर सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना को सशक्त किया। यह स्नान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भावनाओं से जुड़ा एक प्रतीकात्मक क्षण भी था।
सूर्य अर्घ्य और विशेष पूजा-अर्चना
मुख्यमंत्री ने संगम में डुबकी लगाने के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया और तीर्थ पुरोहितों के सान्निध्य में विशेष पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश की खुशहाली, शांति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए प्रार्थना की। संगम तट पर “हर हर गंगे” और “जय श्रीराम” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
माघ मेला: सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक
माघ मेला सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक माना जाता है। यह वह समय होता है जब लाखों साधु-संत, कल्पवासी और श्रद्धालु गंगा तट पर आकर तप, साधना, दान और सेवा के माध्यम से आत्मशुद्धि का मार्ग अपनाते हैं। मुख्यमंत्री योगी का इस पावन आयोजन में सम्मिलित होना श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रेरणा का विषय बना।
साधु-संतों से संवाद और आशीर्वाद
स्नान और पूजा के बाद मुख्यमंत्री ने मेला क्षेत्र में स्थित विभिन्न अखाड़ों और संत शिविरों का भ्रमण किया। उन्होंने प्रमुख साधु-संतों और महामंडलेश्वरों से भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया और माघ मेला तथा आगामी महाकुंभ को और अधिक भव्य और सुव्यवस्थित बनाने को लेकर उनके सुझाव सुने।
प्रशासनिक समीक्षा और जनसेवा का संकल्प
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दौरा प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुविधाओं और यातायात प्रबंधन की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। इस प्रकार माघ मेला 2026 में उनका संगम स्नान आस्था, शासन और सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण बन गया।