हिंदू धर्म में सोने को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। सोना सम्मान, समृद्धि और पवित्र ऊर्जा का द्योतक है। यही कारण है कि सोने को शरीर के ऊपरी हिस्सों जैसे गले, कान, हाथ और सिर पर धारण करने की परंपरा है। पैरों को शरीर का सबसे निम्न और अपवित्र भाग माना गया है। ऐसे में पैरों में सोना पहनना माता लक्ष्मी का अपमान माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से लक्ष्मी कृपा कम हो सकती है और घर में सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है।
पैरों में सोना पहनने से क्या होता है?
धर्म ग्रंथों में सोने को दिव्यता और धन का प्रत्यक्ष प्रतीक बताया गया है। इसलिए सोने को पैरों में पहनना न केवल असम्मानजनक माना जाता है, बल्कि इससे देवी-देवताओं की कृपा भी कम हो सकती है। मान्यता है कि पैरों में सोना धारण करने से जीवन में अनावश्यक परेशानियाँ, आर्थिक कठिनाइयाँ और वैवाहिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। पैरों में सोना पहनना ऊर्जा के प्रवाह को भी बाधित कर देता है, जिससे मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
चांदी पैर में ही क्यों पहनी जाती है?
चांदी की प्रकृति सोने से भिन्न मानी जाती है। चांदी शरीर की निचली ऊर्जा को शांत, ठंडा और संतुलित करती है। इसलिए पायल, बिछिया और कड़े जैसे गहने चांदी के बनाए जाते हैं। चांदी धरती से आने वाली ऊर्जा को धनात्मक रूप से अवशोषित करती है, जिससे स्वास्थ्य और मानसिक स्थिरता बनी रहती है। पुरानी मान्यताओं में चांदी को धरती तत्व से जुड़ा बताया गया है, इसलिए इसे कमर के नीचे पहनना शुभ माना गया है।
ज्योतिष के अनुसार पैरों में सोना पहनने के प्रभाव
ज्योतिषशास्त्र में सोना देवगुरु बृहस्पति का धातु माना जाता है। सोना धारण करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है और ज्ञान, धन, संतान एवं वैवाहिक जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। परंतु जब सोना पैरों में पहना जाता है, तो गुरु ग्रह का प्रभाव कम होता है। ऐसा माना जाता है कि इससे कुंडली में बृहस्पति कमजोर पड़ सकता है, जिसके कारण घर में लक्ष्मी का वास कम होना, आर्थिक रुकावटें, निर्णय क्षमता में कमी और पारिवारिक जीवन में तनाव जैसे परिणाम सामने आ सकते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टि से पैरों में सोना न पहनने का कारण
वैज्ञानिक तौर पर सोना शरीर की ऊपरी ऊर्जा को सक्रिय करता है, जबकि चांदी शरीर के निचले हिस्से को शांत और संतुलित करती है। पैरों में सोना पहनने से ऊर्जा का प्राकृतिक प्रवाह बिगड़ जाता है, जिससे व्यक्ति बेचैनी, तनाव और भावनात्मक असंतुलन का अनुभव कर सकता है। वहीं चांदी पैरों के नाड़ियों पर ठंडक और राहत देती है, जिससे शरीर में ऊर्जा का संतुलन बना रहता है।