प्रयागराज त्रिवेणी संगम के तट पर विराजमान एकमात्र “लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा” न केवल भक्ति की आस्था का केंद्र है, बल्कि एक रहस्यमयी और चमत्कारी कथा से भी जुड़ी हुई है। आइए जानें — क्यों हैं यह प्रतिमा ज़मीन के अंदर, क्यों हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन को आते हैं, और क्या है इसके पीछे की रहस्यमय पौराणिक कथा।
मंदिर का स्थान: कहां है ये “लेटे हुए हनुमान मंदिर”?
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (प्राचीन नाम: इलाहाबाद) में त्रिवेणी संगम — जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती मिलती हैं — वहीं पर स्थित है “श्री लेटे हुए हनुमान जी मंदिर”, जिसे स्थानीय लोग “बड़े हनुमान मंदिर” के नाम से भी जानते हैं।
यह मंदिर प्रयागराज के किले की दीवार से सटा हुआ है, और संगम तट से कुछ ही कदमों की दूरी पर स्थित है। श्रद्धालु मानते हैं कि संगम में स्नान के बाद अगर हनुमान जी के दर्शन न किए जाएँ, तो स्नान अधूरा माना जाता है।
अनोखी विशेषता: क्यों लेटे हैं हनुमान जी?
यह मंदिर अपने विशेष रूप के लिए प्रसिद्ध है — यहाँ हनुमान जी खड़े या बैठे नहीं, बल्कि लेटे हुए अवस्था में हैं। 20 फीट लंबी प्रतिमा लाल रंग से रंगी हुई है, जिसमें भगवान हनुमान अपने दोनों हाथों को सीने पर रखकर, विश्राम मुद्रा में लेटे हुए दिखाई देते हैं।
इसी विशेषता के कारण इसे दुनिया की एकमात्र “श्री लेटे हुए हनुमान जी ” प्रतिमा माना जाता है। अधिकतर मंदिरों में हनुमान जी खड़े या युद्ध मुद्रा में दिखाई देते हैं, परंतु यहाँ वे विश्राम अवस्था में हैं — यह रहस्य कई पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है।
पौराणिक कथा: क्यों लेटे थे हनुमान जी?
लंका विजय के बाद हनुमान जी का विश्राम
रामायण के अनुसार, जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध करके सीता माता को वापस लाया, तब हनुमान जी भी लंका से अयोध्या लौटे। परंतु इतने लंबे युद्ध और सतत सेवाओं के कारण वे अत्यंत थक चुके थे।
तब माता सीता ने उन्हें कहा — “हनुमान, अब तुम विश्राम करो, तुम्हारे बिना तो भगवान राम ने भी विजय पूरी नहीं की थी।” सीता माता की आज्ञा पर हनुमान जी ने संगम तट पर आकर आराम किया और विश्राम की मुद्रा में लेट गए। कालांतर में इसी स्थान पर यह प्रतिमा स्थापित की गई।
मंदिर से जुड़ी अन्य कथा
मंदिर के निर्माण से जुड़ी एक अन्य कथा भी मिलती है, जिसके अनुसार, प्राचीन काल में एक व्यापारी नाव में हनुमान जी की इस मूर्ति को लेकर जा रहा था। जब नाव संगम के तट पर पहुंची तो हनुमान जी की यह मूर्ति यहां गिर गई।
व्यापारी ने हनुमान जी की मूर्ति उठाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह इसे हिला तक नहीं पाया। रात में उस व्यापारी को सपना आया, जिसमें हनुमान जी उसे दर्शन देते हुए कहा कि वह इस संगम पर ही विराजमान होना चाहते हैं। तब व्यापारी ने हनुमान जी की इस मूर्ति को यहीं रहने दिया।
अकबर की कोशिश और चमत्कार
माना जाता है कि मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में प्रयागराज के किले का निर्माण हुआ। एक बार उन्होंने इस मंदिर को हटवाने की कोशिश की ताकि किले की दीवार को सीधा किया जा सके। जब हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने के लिए मजदूर भेजे गए, तो प्रतिमा गहराई में और धँसती चली गई। अंततः प्रतिमा नहीं हटाई जा सकी, और किले की दीवार को झुका कर बनाया गया। यह घटना हनुमान जी की अडिग और चमत्कारी शक्ति को दर्शाती है।
आध्यात्मिक मान्यता और आस्था
- मंत्रोच्चार के बिना भी फलदायी — मान्यता है कि यहां बिना किसी विशेष अनुष्ठान के भी सच्चे मन से मांगी गई प्रार्थनाएं पूर्ण होती हैं।
- स्नान के बाद दर्शन आवश्यक — कुंभ या माघ मेला के दौरान लाखों श्रद्धालु संगम स्नान के बाद इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।
- बड़ा मंगल का विशेष महत्व — उत्तर भारत में “बड़ा मंगल” पर्व (विशेषकर मई–जून) के दौरान यहां श्रद्धालुओं का मेला लगता है।
मंदिर की संरचना और तथ्य
विवरण जानकारी
प्रतिमा की लंबाई लगभग 20 फीट
प्रतिमा की स्थिति ज़मीन से लगभग 8–10 फीट नीचे बनी हुई है
स्थापना लगभग 600–700 वर्ष पूर्व (बालगिरी महाराज द्वारा)
चढ़ावा / पूजन लाल चोला, सिंदूर, फूल, नारियल
मंदिर का प्रवेश शुल्क निःशुल्क
दर्शन समय सुबह 5 बजे से दोपहर 12 तक, फिर शाम 4 से रात 9
प्रमुख पर्व बड़ा मंगल, राम नवमी, हनुमान जयंती
डिजिटल दर्शन और लाइव स्ट्रीमिंग
आज के डिजिटल युग में इस मंदिर के दर्शन अब ऑनलाइन भी किए जा सकते हैं। कई यूट्यूब चैनल्स और फेसबुक पेज लाइव दर्शन प्रसारित करते हैं, खासकर बड़ा मंगल और कुंभ के समय।
कैसे पहुंचे मंदिर?
रेल मार्ग: प्रयागराज जंक्शन से मंदिर की दूरी मात्र 4–5 किमी है।
एयरपोर्ट: प्रयागराज एयरपोर्ट से 12 किमी।
स्थानीय साधन: ऑटो, ई-रिक्शा, कैब आसानी से उपलब्ध।
आस्था, चमत्कार और इतिहास का संगम
लेटे हुए हनुमान जी का यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है।
जहां त्रिवेणी संगम तीन पवित्र नदियों का मिलन है, वहीं यह मंदिर आस्था, इतिहास और चमत्कारों का संगम है।
“संगम में स्नान अधूरा है, यदि लेटे हुए बजरंगबली के दर्शन न हों।”