भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु के पांचवें अवतार भगवान वामन के प्राकट्य उत्सव के रूप में वामन जयंती मनाई जाती है। इसे वामन द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान वामन की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से अहंकार का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
वामन जयंती के दिन क्या न करें?
वामन जयंती के दिन क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचना चाहिए। किसी का अपमान या अनादर करने से भी बचें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सात्त्विक आहार ग्रहण करना शुभ माना जाता है। इसलिए मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन न करने की परंपरा है।
इस दिन किए गए वचन को पूरा करने का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान वामन और राजा बलि की कथा हमें दिए गए वचन के पालन की याद दिलाती है। इसलिए यदि किसी जरूरतमंद की सहायता या दान का वचन दिया है, तो उसे पूरा करने का प्रयास करें। घर आए किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार खाली हाथ न लौटाएं। साथ ही, पूजा और व्रत के दिन बाल और नाखून काटने से बचने की भी धार्मिक परंपरा है।
वामन जयंती के दिन क्या करें?
इस दिन भगवान विष्णु के नाम और मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु भगवान वामन की कथा का पाठ या श्रवण भी करते हैं। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। वामन जयंती पर घर और पूजा स्थल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा करें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन वस्त्र, अनाज, छाता, फल-सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान किया जा सकता है।
वामन जयंती 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में वामन जयंती 23 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। द्वादशी तिथि 22 सितंबर 2026 की रात 9:43 बजे से शुरू होकर 23 सितंबर 2026 की रात 10:50 बजे तक रहेगी। वामन जयंती भगवान विष्णु के वामन अवतार की स्मृति का पावन पर्व है। इस दिन पूजा, कथा-श्रवण, मंत्र जाप और दान-पुण्य के साथ सात्त्विक आचरण करने की परंपरा है।