Monday, 23 Mar 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > उत्पन्ना एकादशी 2025: व्रत, कथा और महत्व
व्रत और त्योहार

उत्पन्ना एकादशी 2025: व्रत, कथा और महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: November 12, 2025 10:12 am
दिव्यसुधा
Share
उत्पन्ना एकादशी पूजा करते हुए भक्त
उत्पन्ना एकादशी 2025 पूजा और व्रत
SHARE

मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली उत्पन्ना एकादशी को सभी एकादशियों में पहली और अत्यंत पवित्र एकादशी माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। धर्मग्रंथों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से पापों का नाश होता है, और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है।

उत्पन्ना एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त 2025

तिथि: 15 नवंबर 2025 (शनिवार)
एकादशी तिथि आरंभ: 15 नवंबर, रात 12:49 बजे
एकादशी तिथि समाप्ति: 16 नवंबर, रात 2:37 बजे
नक्षत्र: उत्तर फाल्गुनी
योग: विश्कुंभ
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 से दोपहर 12:27 तक

यह समय पूजा और व्रत आरंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

उत्पन्ना एकादशी का पौराणिक महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में मुर नामक एक असुर के अत्याचारों से देवता और मनुष्य दोनों परेशान थे। तब भगवान विष्णु ने उसकी विनाश लीला रचने के लिए अपनी शक्ति से एकादशी देवी को उत्पन्न किया। देवी ने मुरासुर का वध किया, और उसी दिन को उत्पन्ना एकादशी कहा गया। इसीलिए इसे सभी एकादशियों की जननी कहा जाता है। इस व्रत के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर की नकारात्मकता, क्रोध, लोभ और अहंकार का नाश करता है और ईश्वर के प्रति समर्पण भाव विकसित करता है।

व्रत और पूजा विधि

उत्पन्ना एकादशी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ व पीले वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करें और उन्हें पीले फूल, तुलसी दल, पीले फल और मिठाई अर्पित करें। भक्त इस दिन निर्जला या फलाहारी व्रत रखते हैं और दिनभर भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं। शास्त्रों में इस दिन अनाज, चावल और दालों का सेवन वर्जित माना गया है। रात्रि में भजन-कीर्तन या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से व्रत पूर्ण होता है।

व्रत का फल और महत्व

उत्पन्ना एकादशी व्रत करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में शुभ फल की प्राप्ति होती है। यह व्रत मोक्ष प्रदायक माना गया है, जिससे जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है। भगवान विष्णु की कृपा से साधक के जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक समृद्धि आती है।

TAGGED:EkadashiVratHinduFestivalSanatanDharmaUtpannaEkadashiVishnuBhakti
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article वास्तु के अनुसार घड़ी की सही दिशा और शुभ स्थान वास्तु के अनुसार घड़ी की दिशा: कौन-सी दिशा शुभ और कौन अशुभ?
Next Article बृहस्पति के कर्क राशि में गोचर से बन रहे हंस महापुरुष राजयोग और केंद्र त्रिकोण राजयोग 2026 बृहस्पति कर्क राशि गोचर 2026: हंस महापुरुष राजयोग से कर्क, तुला और कन्या राशि की किस्मत चमकेगी
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

हर महीने की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश जी की पूजा का महत्व और तीनों चतुर्थियों का अंतर
व्रत और त्योहार

गणेश चतुर्थी, विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी में क्या है अंतर? जानिए महत्व

By दिव्यसुधा
अक्षय नवमी 2025 पर आंवले के पेड़ की पूजा करते श्रद्धालु – भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना का दृश्य
व्रत और त्योहार

अक्षय नवमी 2025: जानिए तिथि, पूजा विधि और इसका धार्मिक महत्व

By दिव्यसुधा
vishnuji aur laxmi mata
व्रत और त्योहार

जीवन में शुभता लाती है कामदा एकादशी

By दिव्यसुधा
माघी पूर्णिमा 2026 पर संगम तट पर पुण्य स्नान करते श्रद्धालु
व्रत और त्योहार

माघी पूर्णिमा 2026: पुण्य, स्नान और साधना का पावन अवसर

By Ekta Mishra
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?