दिवाली का त्योहार करीब है और इस पावन अवसर पर लोग सुख, समृद्धि और रोगमुक्ति की कामना लेकर मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं। भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जो अपनी अद्भुत मान्यताओं और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध हैं। किसी मंदिर में दर्शन करने से कोर्ट-कचहरी के मामलों से मुक्ति मिलती है, तो किसी स्थान पर श्रद्धालु रोगों से मुक्ति की आस लेकर पहुंचते हैं। वाराणसी में स्थित महामृत्युंजय महादेव मंदिर भी ऐसा ही एक चमत्कारी स्थल है। यहां एक प्राचीन कुआं है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसका जल रोगों से मुक्ति दिलाता है। कहा जाता है कि स्वयं धन्वंतरि देव के प्राण भी इसी कुएं के जल से बचे थे। इसलिए दिवाली के दिन यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
एक चमत्कारी मंदिर : जहां पानी के स्पर्श से होता है रोगों का नाश
धनतेरस का पर्व आने वाला है इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व होता है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और औषधियों का देवता माना जाता; है। ऐसा विश्वास है कि उनकी कृपा से हर तरह की बीमारी दूर हो जाती है। वाराणसी में भगवान शिव और धन्वंतरि का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जहां एक चमत्कारी कुआं स्थित है। कहा जाता है कि इस कुएं के पानी के स्पर्श से ही रोगों का नाश हो जाता है। श्रद्धालु यहां स्नान या जल स्पर्श करके आरोग्य और दीर्घायु की कामना करते हैं।
इस मंदिर में मिलता है भगवान धन्वंतरि का आशीर्वाद
वाराणसी का महामृत्युंजय महादेव मंदिर अत्यंत चमत्कारी माना जाता है। यहां आने वाले भक्त असामयिक मृत्यु और बीमारियों से मुक्ति की कामना करते हैं। इस मंदिर में एक दिव्य कुआं है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसमें भगवान धन्वंतरि का आशीर्वाद और औषधियों की शक्ति समाई हुई है। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के बाद भगवान धन्वंतरि ने अपनी औषधियां इसी कुएं में डाली थीं। इसलिए इस कुएं का जल चमत्कारी माना जाता है। श्रद्धालु इस पवित्र जल का सेवन और स्पर्श कर रोगों से राहत पाते हैं। दिवाली और धनतेरस पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
महादेव की शरण में आए थे भगवान धन्वंतरि
महामृत्युंजय महादेव मंदिर को लेकर एक रोचक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि महाभारत काल में भगवान धन्वंतरि को तक्षक नाग ने डस लिया था। विष के प्रभाव से बचने के लिए वे भगवान महादेव की शरण में आए और इसी मंदिर के पवित्र कुएं के जल से उन्होंने स्वयं को जीवित किया। ऐसा माना जाता है कि उस समय भगवान धन्वंतरि ने इस कुएं में अनेक औषधियां डालीं ताकि लोग रोगों से मुक्ति पा सकें। आज भी भक्त इस जल को पीकर या अपने घर ले जाकर अपने परिजनों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
इस कुएं का पानी कभी नहीं सूखता
इतना ही नहीं, मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि इस कुएं का पानी कभी सूखता नहीं है। यह जल शरीर और आत्मा दोनों को शुद्ध करने की शक्ति रखता है। मान्यता है कि इसके स्पर्श मात्र से रोगों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, मंदिर की मिट्टी और पानी में अनेक औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो इसे और भी पवित्र बनाते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि यह जल भगवान धन्वंतरि के आशीर्वाद से आज भी चमत्कारिक रूप से लोगों के स्वास्थ्य को संवारने का काम करता है।
इस मंदिर में दिवाली के दिन होती है विशेष पूजा
मंदिर में केवल भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित है, जिसे देखने और उसकी पूजा करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। माना जाता है कि यहां महादेव की उपासना करने से मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। खासकर सावन और दिवाली के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा और आयोजन किए जाते हैं, जिससे श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। यहां आने वाले भक्त भगवान शिव के आशीर्वाद से मानसिक शांति, रोगों से मुक्ति और समृद्धि की कामना करते हैं। मंदिर का वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव और सुख-शांति का एहसास कराता है।