लखनऊ। धर्म, संस्कृति और समाज को नई दिशा देने के उद्देश्य से विश्वमांगल्य सभा द्वारा प्रथम स्थापना बालागंज, हैदरगंज स्थित मंदिर में सदाचार सभा का आयोजन किया गया। यह आयोजन आध्यात्मिकता और सामाजिक सदाचार को एक नई गति देने का प्रयास माना गया।
आयोजन का शुभारंभ हवन से
कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र हवन से हुई। महिला आचार्या डॉ. अंजु चौधरी ने मंत्रोच्चारण के बीच हवन सम्पन्न कराया। बालकों ने राष्ट्र की मंगलकामना हेतु आहुति दी। पूरे मंदिर परिसर में वातावरण पवित्र ऊर्जा और सकारात्मक भाव से भर गया।
नगर अध्यक्ष नमिता शुक्ला जी की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास समाज में नैतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
मंत्रोच्चारण से गूंजा वातावरण
सभा की संयोजिका प्रतिभा बालियान ने उपस्थित लोगों को विश्वमांगल्य सभा और सदाचार सभा की परिचय प्रणाली से अवगत कराया। नन्हीं बालिकाएँ रिदिमा और वेदांशी ने धारा प्रवाह मंत्रोच्चारण कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। यह दृश्य बच्चों और महिलाओं दोनों के लिए प्रेरणादायी रहा।
लेखन व संस्कार का संदेश
इस आयोजन में अवध प्रांत सहसचिव रमा कर्नवाल का लेखन कार्य में विशेष सहयोग रहा। बच्चों ने भी “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र लिखकर अपनी आस्था और संस्कार का परिचय दिया। सभी बच्चों को उपहार स्वरूप हिंदी गिनती का कैलेंडर और हिंदी पखवाड़े की सामग्री राजाजीपुरम की पार्षद गौरी सांवरिया जी द्वारा भेंट की गई।
मुख्य अतिथि का संदेश
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि गौरी सांवरिया जी ने धर्म और संस्कृति के प्रसार के लिए निरंतर योगदान का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा – “आज समाज को संस्कारों की सबसे अधिक आवश्यकता है। जब महिलाएँ और बच्चे इस दिशा में आगे बढ़ेंगे, तभी समाज सही राह पर चलेगा।”

मातृशक्ति का योगदान
अवध प्रांत सहसंयोजिका नम्रता तिवारी ने महिलाओं से संवाद कर नियमित अभ्यास और प्रसार के महत्व पर बल दिया।
मुख्य संयोजिका गीता सक्सेना के अथक प्रयासों से कार्यक्रम संभव हुआ। पिछली बार हरियाली तीज पर शुरू हुई छोटी पहल आज व्यापक रूप में सामने आई। मान सिंह जी और उनका पूरा परिवार इस आयोजन में सक्रिय रहा। साथ ही मोहल्ले की महिलाओं ने भी सहयोग कर इसे सफल बनाया।
इको-फ्रेंडली गणपति से पर्यावरण संदेश
सभा में उपस्थित बहनों ने आटे से इको-फ्रेंडली गणपति प्रतिमा बनाई और बताया कि POP की मूर्तियाँ जलीय जीवों के लिए हानिकारक होती हैं। संदेश दिया गया कि मिट्टी, गोबर और आटे से बनी मूर्तियाँ ही सच्ची भक्ति का प्रतीक हैं।
बच्चों और युवाओं की भागीदारी
वीरा सिन्हा, यश सिन्हा और वरन्या ने भी आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग दिया। बच्चों में यह प्रेरणा दी गई कि सदाचार और संस्कारों का पालन करने से ही वे समाज के सच्चे स्तंभ बन पाएंगे।
आयोजन का मूल संदेश
सभा का मूल संदेश स्पष्ट रहा – “जब मातृशक्ति जागेगी, तभी बच्चे अपने मूल्यों को समझेंगे। सदाचार सभा का यही उद्देश्य है – जागरूकता और संस्कृति का संवर्धन।” प्रतिभा बालियान ने कहा कि यदि हम अपने बच्चों और परिवारों को संस्कार देंगे, तभी समाज और राष्ट्र को बचा पाएंगे।