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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > परिवर्तिनी एकादशी 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, जानें व्रत का महत्व
व्रत और त्योहार

परिवर्तिनी एकादशी 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, जानें व्रत का महत्व

परिवर्तिनी एकादशी 2025 का व्रत 3 सितंबर को रखा जाएगा।

दिव्यसुधा
Last updated: August 30, 2025 10:30 am
दिव्यसुधा
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भगवान विष्णु की कृपा पाने का श्रेष्ठ दिन – परिवर्तिनी एकादशी 2025
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Highlights
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 7:35 से 9:10 बजे तक।
  • व्रत पारण: 4 सितंबर को दोपहर 1:46 से 4:07 बजे तक।
  • इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं, hence नाम "परिवर्तिनी"।

नई दिल्ली। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला परिवर्तिनी एकादशी व्रत हिंदू धर्म में बेहद खास महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में करवट बदलते हैं और भक्तों को असीम आशीर्वाद देते हैं। यही कारण है कि इस व्रत को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। कहीं-कहीं इसे पदमा और जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत-पूजन करने से न सिर्फ पापों से मुक्ति मिलती है बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि, विवाह में बाधा दूर होने और मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इस वर्ष परिवर्तिनी एकादशी 2025 का व्रत 3 सितंबर को रखा जाएगा।

तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार इस बार एकादशी तिथि की शुरुआत 3 सितंबर को सुबह 04 बजकर 53 मिनट पर होगी और इसका समापन 4 सितंबर को सुबह 04 बजकर 21 मिनट पर होगा। ऐसे में व्रत 3 सितंबर 2025 को रखा जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त – सुबह 7:35 से 9:10 बजे तक का समय सबसे उत्तम रहेगा। इस अवधि में भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से भक्त को विशेष फल की प्राप्ति होगी।

व्रत पारण का समय
व्रत रखने के बाद अगले दिन पारण करना अनिवार्य होता है। इस बार 4 सितंबर को दोपहर 1:46 से 4:07 बजे तक व्रत का पारण किया जा सकता है।

पूजा विधि
परिवर्तिनी एकादशी की पूजा करते समय शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। सबसे पहले एक स्वच्छ चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। भगवान को पीले वस्त्र पहनाएं और पीले फूल, फल व चंदन अर्पित करें। तुलसी दल, पंचामृत, हलवा या धनिया पंजीरी का भोग लगाएं। घी का दीपक और धूप जलाकर विष्णु चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती कर परिवार के कल्याण, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्रार्थना करें। व्रत पारण के अगले दिन जरूरतमंदों को भोजन और दान अवश्य दें।

व्रत का महत्व
मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं और इससे सृष्टि की ऊर्जा का संतुलन बदलता है। इस दिन दान-पुण्य विशेष महत्व रखता है। खासकर छाता, दही, जूते और जल से भरा कलश दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। व्रत रखने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति, विवाह संबंधी बाधाओं से छुटकारा और आर्थिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है। जो साधक पूरे श्रद्धा भाव से व्रत करता है, उसे अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।

व्रत कथा और धार्मिक मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में शयन करते हैं तो इस एकादशी को करवट बदलने का दिन कहा जाता है। यही कारण है कि इसे परिवर्तिनी नाम दिया गया। इस दिन किए गए पुण्य कार्य और उपासना से जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ दूर होती हैं।

भगवान विष्णु की आरती

पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती करना बेहद शुभ माना जाता है।

  • ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
  • भक्तजनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
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