भाद्रपद शुक्ला एकादशी पर मनाया जाने वाला करमा पर्व प्रकृति, भाई–बहन और सामूहिकता का प्रतीक है
नमो नमो दुर्गे सुख करनी, नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी
सुंदरकांड की चौपाई "पुनि संभारि उठि सो लंका…" का जाप करने से संकट दूर होते हैं।
15 सितंबर सुबह 06:15 बजे अष्टमी समाप्त होगी और उसी दिन व्रत का पारण किया जाएगा।
सूर्य की कृपा से चमकता जीवन: उत्तराषाढ़ नक्षत्र वालों में गजब का नेतृत्व और सफलता
अनंत सूत्र बांधने से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि मिलती है।
पितृ पक्ष 2025: पूर्वजों की कृपा पाने के लिए लगाएं पीपल, बरगद और तुलसी के पौधे
परिवर्तिनी एकादशी 2025 का व्रत 3 सितंबर को रखा जाएगा।
जब मातृशक्ति जागेगी, तभी समाज संस्कारों से प्रकाशित होगा।
दीपक की लौ में दिखा फूल और चक्र – भगवान की कृपा का दिव्य संकेत
भक्त करेंगे राधा-कृष्ण की पूजा, मिलेगा सौभाग्य और प्रेम का आशीर्वाद
पितृपक्ष की परंपराएं केवल आस्था ही नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और मानसिक शांति की भी रक्षा…
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