हर शुक्रवार श्रीसूक्त का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से मां लक्ष्मी का स्मरण करते हुए श्रीसूक्त का पाठ करता है, उसे जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती। श्रीसूक्त में मां लक्ष्मी की महिमा और कृपा का सुंदर वर्णन मिलता है। नियमित रूप से शुक्रवार के दिन इसका पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और यश की प्राप्ति होती है। मां लक्ष्मी की आराधना करने से न केवल आर्थिक संकट दूर होते हैं, बल्कि घर में शांति और सौभाग्य भी बना रहता है। यह भी माना जाता है कि श्रीसूक्त के पाठ से जन्म-जन्मांतर की दरिद्रता समाप्त हो जाती है और साधक को ऐश्वर्य तथा वैभव की प्राप्ति होती है। इसलिए हर शुक्रवार को श्रीसूक्त का पाठ अवश्य करना चाहिए ताकि मां लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहे।
ओम हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्त्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह॥
ओम तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम॥
ओम अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनाद्प्रमोदिनिम।
श्रियं देविमुप हव्ये श्रीर्मा देवी जुषताम ॥
ओम कां सोस्मितां हिरण्य्प्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्।
पद्मेस्थितां पदमवर्णां तामिहोप हवये श्रियम्॥
ओम चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्ती श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्।
तां पद्मिनीमी शरणं प्रपधे अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥
ओम आदित्यवर्णे तप्सोअधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोsथ बिल्वः।
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याष्च बाह्य अलक्ष्मीः॥
उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।
प्रदुर्भूतोsस्मि राष्ट्रेsस्मिन कीर्तिमृद्धिं ददातु में ॥
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठमलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृद्धि च सर्वां निर्णुद में गृहात्॥
गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यापुष्टां करीषिणीम्।
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोप हवये श्रियम्।
मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।
पशुनां रूपमन्नस्य मयि श्रियं श्रयतां यशः॥
कर्दमेन प्रजा भूता मयि संभव कर्दम।
श्रियम वास्य मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्॥
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस् मे गृहे।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ॥
आद्रॉ पुष्करिणीं पुष्टिं पिंगलां पदमालिनीम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मी जातवेदो म आ वह॥
आद्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मी जातवेदो म आ वह॥
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मी मनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योाश्रान विन्देयं पुरुषानहम्॥
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्।
सूक्तं पञ्चदशर्च च श्रीकामः सततं जपेत्॥
श्री सूक्त का पाठ हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और मंगलकारी माना गया है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और आस्था से इसका पाठ करता है, उस पर माता लक्ष्मी की असीम कृपा बरसती है। हे लक्ष्मी देवी! आप कमलमुखी हैं, कमल के पुष्पों पर विराजमान हैं और आपके नेत्र भी कमल के समान हैं। आप कमल पुष्पों को प्रिय मानती हैं। संसार के सभी प्राणी आपकी कृपा पाने की इच्छा रखते हैं। आप सबकी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं। हे देवी! आपके चरण कमल सदा मेरे हृदय में स्थिर रहें और मुझे सच्चे अर्थों में आपके भक्त बनने का वरदान दें।
हे महालक्ष्मी! आप कमल से उत्पन्न हुई हैं, आपके नेत्र कमल की भांति सुंदर हैं। मैं आपको नमन करता हूं और आपसे प्रार्थना करता हूं कि मुझ पर अपनी अनुकंपा बनाए रखें। हे मां! आप धन, गाय, घोड़े और समृद्धि प्रदान करने वाली हैं। कृपया मुझ पर दया करें और मेरे जीवन को सुख, समृद्धि और धन से भर दें। मेरी हर मनोकामना को पूर्ण करें और मेरे जीवन में सफलता का प्रकाश फैलाएं।
हे जगत जननी! आप समस्त जीवों की पालनहार हैं। कृपया मुझ पर करुणा दृष्टि डालें और मुझे संतान, धन-धान्य, रथ, गज, अश्व तथा दीर्घायु का आशीर्वाद दें। हे देवी, आप में अपार शक्ति और सामर्थ्य है। अपनी कृपा से मुझे वायु, अग्नि, जल, सूर्य, वरुण और बृहस्पति जैसे देवताओं की कृपा प्राप्त कराएं और मुझे वैभव से संपन्न करें।
हे गरुड़ देव! हे देवगण, जो अमृत पान करते हैं, कृपया मुझे भी अमृतमय धन और सौभाग्य प्रदान करें। जो व्यक्ति इस श्री सूक्त का नियमित पाठ करता है, वह क्रोध, लोभ और मत्सर जैसे दोषों से मुक्त होकर सदा सत्कर्म के मार्ग पर चलता है।
हे कमलवती माता लक्ष्मी! आप श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, चंदन और पुष्पों से विभूषित हैं। हे विष्णुप्रिया देवी! कृपया मेरे जीवन में सुख, यश और समृद्धि का वास करें। आपका भक्ति भाव से स्मरण करने वाला हर व्यक्ति तेजस्वी, स्वस्थ और दीर्घायु बनता है। श्रीसूक्त पाठ से जीवन में धन, वैभव और सुख की निरंतर वृद्धि होती है।