भगवान शिव को समर्पित श्रावण मास को सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस वर्ष सावन 2026 में एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो लगभग 18 साल बाद देखने को मिलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रावण अमावस्या पर सूर्य ग्रहण और श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) पर चंद्र ग्रहण लगने वाला है। ऐसा ही संयोग वर्ष 2008 में भी बना था। हालांकि, इन दोनों ग्रहणों का भारत में दृश्य न होने के कारण इनका सूतक काल मान्य नहीं होगा। आइए जानते हैं इस विशेष ग्रहण योग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
18 साल बाद सावन में बना दुर्लभ ग्रहण योग
वर्ष 2008 के सावन माह में श्रावण अमावस्या पर सूर्य ग्रहण और लगभग 15 दिन बाद श्रावण पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण लगा था। ठीक उसी प्रकार का संयोग अब वर्ष 2026 में बन रहा है। ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से यह एक दुर्लभ घटना मानी जाती है, क्योंकि एक ही सावन मास में सूर्य और चंद्र दोनों ग्रहण पड़ रहे हैं।हालाँकि, दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए इनके धार्मिक नियमों में कुछ महत्वपूर्ण अंतर रहेगा।
सूर्य ग्रहण 2026: तिथि और समय
सावन अमावस्या अर्थात 12 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रहण लगेगा।
तिथि: 12 अगस्त 2026
ग्रहण प्रारंभ: रात्रि 9:04 बजे
ग्रहण समाप्त: 13 अगस्त प्रातः 4:25 बजे (भारतीय समय)
धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य ग्रहण अमावस्या तिथि पर लगना विशेष महत्व रखता है, लेकिन इस बार यह भारत में दिखाई नहीं देगा।
चंद्र ग्रहण 2026: तिथि और समय
श्रावण पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन के दिन 28 अगस्त 2026 को वर्ष का अंतिम चंद्र ग्रहण लगेगा।
तिथि: 28 अगस्त 2026
ग्रहण प्रारंभ: सुबह 6:53 बजे
ग्रहण समाप्त: दोपहर 12:32 बजे (भारतीय समय)
दुनिया के कुछ हिस्सों में यह ग्रहण ब्लड मून के रूप में दिखाई देगा, जिसमें चंद्रमा लाल या गहरे भूरे रंग का दिखाई देता है।
क्या सूर्य ग्रहण का सूतक काल मान्य होगा?
सामान्यतः सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से लगभग 12 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है। इस अवधि में पूजा-पाठ, शुभ कार्य और मंदिरों के कपाट बंद रखने की परंपरा है। लेकिन 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारतीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। इस कारण मंदिरों में नियमित पूजा-अर्चना, दर्शन और अन्य धार्मिक कार्य सामान्य रूप से होते रहेंगे।
क्या चंद्र ग्रहण का सूतक काल लगेगा?
चंद्र ग्रहण का सूतक सामान्यतः ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले माना जाता है।
हालाँकि, 28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण भी भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए इसका सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं माना जाएगा। श्रद्धालु उस दिन सामान्य रूप से पूजा, व्रत, रक्षाबंधन और अन्य धार्मिक कार्य कर सकेंगे।
ग्रहण के दौरान क्या रखें ध्यान?
चूँकि दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विशेष प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। मंदिरों के कपाट बंद करने, भोजन त्यागने या ग्रहण के बाद घर की शुद्धि करने जैसी परंपराओं का पालन आवश्यक नहीं माना जाएगा। फिर भी कई श्रद्धालु अपनी व्यक्तिगत आस्था के अनुसार भगवान शिव, सूर्य देव और चंद्र देव की उपासना, मंत्र जाप तथा ध्यान करना शुभ मानते हैं।
धार्मिक दृष्टि से ग्रहण का महत्व
सनातन धर्म में ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना गया है। ग्रहण के समय मंत्र जाप, ध्यान, दान और ईश्वर का स्मरण पुण्यदायी माना जाता है। हालांकि, जब ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई नहीं देता, तो अधिकांश धार्मिक नियम और सूतक काल उस क्षेत्र में लागू नहीं होते।