राजस्थान के अलवर जिले के राजगढ़ में भगवान जगन्नाथ जी महाराज की 172वीं ऐतिहासिक रथयात्रा श्रद्धा, भक्ति और परंपरा के साथ निकाली गई। चौपड़ बाजार स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से प्रारंभ हुई इस भव्य रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सशस्त्र पुलिस की सलामी और शाही लवाजमे के साथ निकली इस यात्रा ने पूरे नगर को भक्तिमय वातावरण से भर दिया।
दूल्हा स्वरूप में सजे भगवान जगन्नाथ
रथयात्रा से पहले महंत पूरणदास और पंडित मदनमोहन शास्त्री ने भगवान जगन्नाथ का विधिवत पूजन-अर्चन किया। भगवान को दूल्हा स्वरूप में विशेष श्रृंगार कर इंद्र रूपी विमान में विराजमान कराया गया। वृंदावन की शाही पोशाक, जयपुर के मोगरे की मालाएं और सऊदी अरब से मंगवाए गए विशेष इत्र से भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया गया। भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए चौपड़ बाजार में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
भजन, संकीर्तन और जयघोष से गूंजा पूरा नगर
रथयात्रा के आगे भजन मंडलियां, झांकियां और संकीर्तन की टोलियां चल रही थीं। घंटे-घड़ियाल, शंखध्वनि और “जय जगदीश हरे” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। भगवान मदनमोहन, राम दरबार और राधा-कृष्ण की सुंदर झांकियों ने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित किया। बड़ी संख्या में भक्त नाचते-गाते भगवान की महिमा का गुणगान करते हुए रथ के साथ चलते रहे।
रथ के नीचे से निकलने की परंपरा निभाने उमड़े श्रद्धालु
रथयात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने रथ के नीचे से निकलकर धार्मिक परंपरा का पालन किया। वहीं कई श्रद्धालु दंडवत प्रणाम करते हुए पूरे मार्ग में भगवान के रथ के साथ चलते रहे। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने यात्रा को और भी भव्य बना दिया।
मार्गभर हुआ स्वागत और प्रसाद वितरण
रथयात्रा के पूरे मार्ग में विभिन्न मंदिरों, सामाजिक संगठनों और सेवाभावी लोगों ने भगवान जगन्नाथ की आरती कर स्वागत किया। श्रद्धालुओं के लिए मीठे पानी, शिकंजी, नींबू पानी और प्रसाद की व्यवस्था की गई। कई स्थानों पर गुलाब के फूलों की वर्षा कर भगवान का अभिनंदन किया गया। जगदीश वाल्मीकि की टीम ने पारंपरिक पट्टेबाजी का प्रदर्शन कर लोगों का मन मोह लिया।
गंगाबाग पहुंचने के साथ शुरू हुआ सात दिवसीय मेला
रथयात्रा देर रात दादूपंथी ठिकाना गंगाबाग पहुंची, जहां वधू पक्ष की ओर से भगवान जगन्नाथ की पुष्पवर्षा और आरती के साथ अगवानी की गई। इसी के साथ सात दिवसीय मेला महोत्सव का शुभारंभ भी हुआ। मेले में श्रद्धालुओं ने झूले, खिलौने, चाट, पकौड़ी, जलेबी, कुल्फी और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया।
करीब 195 वर्ष पुराना है ऐतिहासिक रथ
राजगढ़ की यह रथयात्रा वर्ष 1855 में भगवान जगन्नाथ पुरी की परंपरा से प्रेरित होकर प्रारंभ हुई थी। भगवान जिस रथ पर विराजमान होते हैं, वह लगभग 195 वर्ष पुराना माना जाता है। यह दो मंजिला रथ लगभग 21 फीट ऊंचा, 18 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा है। समय के साथ इसकी संरचना में आवश्यक परिवर्तन किए गए हैं। पहले लकड़ी के पहियों वाला यह रथ अब लोहे के पहियों, स्टेरिंग और बेयरिंग से सुसज्जित है, जिससे इसे सुरक्षित और सुगमता से संचालित किया जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था रही पूरी तरह चाक-चौबंद
रथयात्रा के दौरान प्रशासन और पुलिस की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई। पूरे मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा और गंगाबाग मेला परिसर में अस्थायी पुलिस चौकी भी स्थापित की गई, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से धार्मिक आयोजन में भाग ले सकें।