सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी इस बार धार्मिक दृष्टि से बेहद खास मानी जा रही है। एकादशी तिथि के साथ कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जिससे इस पावन दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और मंत्र-जप करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पुत्रदा एकादशी के साथ ही मंदिरों में भक्ति और उत्सव का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। 24 से 28 अगस्त तक भव्य झूलनोत्सव का आयोजन होगा, वहीं 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र के विशेष संयोग में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण विशेष रूप से भक्तिमय रहने वाला है।
पुत्रदा एकादशी पर बनेंगे कई शुभ योग
इस बार पुत्रदा एकादशी पर सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग बनने की बात कही जा रही है। धार्मिक मान्यताओं में इन योगों को पूजा-पाठ, साधना और शुभ कार्यों के लिए विशेष फलदायी माना गया है। विशेष रूप से सर्वार्थ सिद्धि योग को कार्यों में सफलता और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए शुभ माना जाता है। ऐसे में भक्त इस दिन भगवान विष्णु की आराधना, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करके विशेष पुण्य की कामना कर सकते हैं।
भगवान विष्णु को समर्पित है पुत्रदा एकादशी
पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र तिथि है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। संतान सुख की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए भी पुत्रदा एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु के समक्ष संतान सुख, परिवार की खुशहाली और जीवन में शांति की कामना करते हैं।
24 से 28 अगस्त तक होगा भव्य झूलनोत्सव
पुत्रदा एकादशी के बाद मंदिरों में झूलनोत्सव की धूम देखने को मिलेगी। 24 से 28 अगस्त तक विभिन्न मंदिरों में राधा-कृष्ण के झूलनोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं को फूलों और आकर्षक सजावट से सजे झूलों पर विराजमान कराया जाएगा। मंदिरों में भजन-कीर्तन, विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। झूलनोत्सव के दौरान श्रद्धालु राधा-कृष्ण के दर्शन कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करेंगे। कई मंदिरों में फूलों और रंग-बिरंगी सजावट के साथ मनमोहक झांकियां भी सजाई जाएंगी।
4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र में मनाई जाएगी जन्माष्टमी
झूलनोत्सव के बाद भक्तों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का इंतजार रहेगा। इस बार 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र के विशेष संयोग में जन्माष्टमी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए रोहिणी नक्षत्र के संयोग वाली जन्माष्टमी को विशेष महत्व दिया जाता है। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों में आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा। लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक कर उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाएंगे। इसके बाद माखन-मिश्री सहित विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित किए जाएंगे। मंदिरों में भजन, कीर्तन और श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ी झांकियां भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
इन 5 राशियों के लिए शुभ रह सकता है समय
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पुत्रदा एकादशी पर बनने वाले शुभ योगों का सकारात्मक प्रभाव कुछ राशियों पर पड़ सकता है। इस दौरान धन, करियर और कारोबार से जुड़े मामलों में नए अवसर मिलने की संभावना मानी जा रही है।
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए आर्थिक दृष्टि से समय अनुकूल रह सकता है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं और लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या महत्वपूर्ण भूमिका मिल सकती है।
मिथुन राशि
मिथुन राशि वालों के लिए करियर में आगे बढ़ने के अवसर बन सकते हैं। नया प्रोजेक्ट मिलने या कारोबार से जुड़ी कोई अच्छी डील होने के योग बन सकते हैं। प्रभावशाली लोगों से संपर्क भविष्य में लाभकारी साबित हो सकता है।
सिंह राशि
सिंह राशि के जातकों को भाग्य का साथ मिल सकता है। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। कारोबार करने वालों को लाभ मिल सकता है और आर्थिक स्थिति में भी सुधार के संकेत हैं।
तुला राशि
तुला राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में समय सकारात्मक रह सकता है। कारोबार के विस्तार की योजनाएं आगे बढ़ सकती हैं। परिवार की ओर से कोई शुभ समाचार मिलने से मन प्रसन्न रहेगा।
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए अटके हुए कार्य पूरे होने के योग बन सकते हैं। नौकरी और कारोबार में नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति बेहतर होने के साथ मानसिक शांति भी मिल सकती है।
पुत्रदा एकादशी पर पूजा में क्या करें?
पुत्रदा एकादशी के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा में भगवान विष्णु को पीले फूल, फल, पीली मिठाई और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप भी किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी पुण्यदायी माना जाता है।
भक्ति और उत्सव से भरा रहेगा आने वाला समय
पुत्रदा एकादशी से शुरू होने वाला यह धार्मिक क्रम झूलनोत्सव और फिर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तक भक्तों को भक्ति के रंग में सराबोर करेगा। भगवान विष्णु की आराधना से लेकर राधा-कृष्ण के झूलनोत्सव और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव तक मंदिरों में धार्मिक आस्था और उत्सव का विशेष वातावरण देखने को मिलेगा। ऐसे में श्रद्धालु इन पावन अवसरों पर पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य के माध्यम से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना कर सकते हैं।