पुरुषोत्तमी एकादशी को लेकर श्रद्धालुओं में इस वर्ष विशेष उत्साह और आस्था देखने को मिल रही है। शास्त्रों में मलमास या अधिक मास में आने वाली इस एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी और हजार गुना फल देने वाली माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन व्रत के प्रभाव से जीवन के पापों का नाश होता है और व्यक्ति को सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में पुरुषोत्तमी एकादशी 27 मई, बुधवार को पड़ रही है, जिसे भक्तजन बड़े श्रद्धा भाव से मना रहे हैं।
व्रत की सही तिथि और विधि का महत्व
धार्मिक ग्रंथों में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि एकादशी का व्रत सही तिथि और विधि के अनुसार ही करना चाहिए। विशेष रूप से “दशमी विधा एकादशी” से बचने की सलाह दी गई है। मान्यता है कि दशमी से युक्त एकादशी का व्रत पूर्ण फल नहीं देता, इसलिए द्वादशी युक्त एकादशी को ही श्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि सही नियमों का पालन न करने पर व्रत का पूर्ण पुण्य लाभ प्राप्त नहीं होता, इसलिए श्रद्धालुओं को इस विषय में सावधानी रखनी चाहिए।
पुरुषोत्तम मास का दिव्य महत्व
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार, पुरुषोत्तम मास स्वयं भगवान श्रीकृष्ण का ही स्वरूप माना जाता है, इसी कारण इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस माह में किए गए व्रत, दान, जप और तप का फल कई गुना बढ़ जाता है। चाहे यज्ञ हो, दान हो या किसी प्रकार का धार्मिक अनुष्ठान, उसका पुण्य हजार गुना तक फलदायी माना गया है। इसी कारण इस मास में आने वाली पुरुषोत्तमी एकादशी का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।
मान्यताएँ और आध्यात्मिक महत्व
इस एकादशी को पद्मिनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि राजा हरिश्चंद्र की पुत्री पद्मिनी ने इस व्रत का पालन किया था, जिससे उसे संतान सुख की प्राप्ति हुई। इसके अलावा इसे भगवान श्रीकृष्ण के “पुरुषोत्तम” नाम से जोड़कर पुरुषोत्तमी एकादशी कहा जाता है। कुछ स्थानों पर इसे कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मलमास में आने वाली दोनों एकादशियाँ अत्यंत फलदायी और मोक्षदायिनी मानी गई हैं।
व्रत के लाभ और आध्यात्मिक फल
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार, एकादशी का व्रत करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। यदि कोई व्यक्ति पूर्ण उपवास न कर सके, तो फलाहार करके भी व्रत का पालन कर सकता है। श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करने के साथ-साथ अंततः मोक्ष की ओर मार्ग प्रशस्त करता है।