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दिव्य सुधा > अन्य > प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी 2026: जानें क्या न करें, पूजा नियम
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प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी 2026: जानें क्या न करें, पूजा नियम

दिव्यसुधा
Last updated: June 17, 2026 12:49 pm
दिव्यसुधा
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भगवान गणेश की पूजा और गणेश चालीसा पाठ से बुधवार के दिन मिलने वाले शुभ फल और विघ्न नाश के संकेत
बुधवार गणेश चालीसा पाठ से मिलती है विघ्नहर्ता गणेश जी की विशेष कृपा
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हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्री गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और रुके हुए कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। भक्त इस दिन व्रत रखकर श्रद्धा और भक्ति से गणपति बप्पा की आराधना करते हैं।

प्रद्युम्न चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी तिथि की शुरुआत 17 जून को रात 09:38 बजे से होगी और इसका समापन 18 जून को शाम 06:58 बजे तक रहेगा। उदयातिथि के अनुसार प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी का व्रत 18 जून को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का मध्याह्न मुहूर्त सुबह 10:58 बजे से दोपहर 01:46 बजे तक रहेगा, जो भगवान गणेश की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन क्या न करें?
इस पावन दिन कुछ नियमों का पालन करना बहुत आवश्यक माना गया है, क्योंकि छोटी-सी गलती भी व्रत के फल को प्रभावित कर सकती है।

चंद्र दर्शन से बचें
विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करना वर्जित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने से व्यक्ति पर झूठा कलंक या अपयश लग सकता है, इसलिए चंद्र दर्शन से बचना चाहिए।

तुलसी दल अर्पित न करें
भगवान गणेश की पूजा में तुलसी पत्र चढ़ाना निषेध माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, तुलसी जी द्वारा गणेश जी को विवाह का श्राप देने की कथा के कारण उनकी पूजा में तुलसी का उपयोग नहीं किया जाता।

तामसिक भोजन और विवाद से दूरी
इस दिन घर का वातावरण पूरी तरह सात्विक रखना चाहिए। मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। साथ ही क्रोध, अपशब्द और किसी भी प्रकार के विवाद से बचना चाहिए, क्योंकि इससे व्रत का पुण्य फल कम हो सकता है।

पशु-पक्षियों को कष्ट न दें
भगवान गणेश का वाहन मूषक है और वे सभी जीवों के प्रति करुणा का संदेश देते हैं। इसलिए इस दिन किसी भी पशु-पक्षी या बेजुबान जीव को कष्ट नहीं देना चाहिए।

प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और श्रद्धा का पर्व है। इस दिन नियमों का पालन करते हुए गणपति बप्पा की सच्चे मन से आराधना करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सभी बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है।

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